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6 दिसंबर 1992: उन्माद को नया रूप देने वाली एक तारीख
यहां मेरी बात पढ़कर अगर आप भी मुझे मुगल प्रेमी, हिंदू विरोधी, फर्जी सेकुलड़ या देशद्रोही जैसी उपाधियां देने दौड़े आते हैं तो सच कहता हूं कि आप के दिमाग में सिर्फ भूसा भरा है। हल्ला करते हुए नहीं मन में शांति से ‘जय श्री राम’ बोलिए मन को शांति मिलेगी और आंखों पर से…
