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  • प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

    प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

    प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।