Tag: कांग्रेस
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हरित क्रांति के नाम पर यूं कंपनियों के गुलाम बन गए किसान
देश में हर महीने 70 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं और ज्यादातर में आत्महत्या की वजह किसान पर बढ़ता कर्ज होता है। किसान कर्जमाफी की मांग को लेकर 180 किलोमीटर पैदल यात्रा भी करते हैं लेकिन कभी यह सवाल सामने नहीं आता है कि कर्ज की वजहें क्या हैं? और कब से ये…
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धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं
इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान सिंह तोमर नाम की फिल्म के इस डायलॉग ने एक बार सोचने को मजबूर कर दिया। उस समय तो यह डायलॉग पसंद नहीं आया था लेकिन धीरे-धीरे खबरें पढ़ते और…
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क्या सिर्फ मोदी से सवाल पूछकर राहुल गांधी पीएम बन जाएंगे?
पिछले साल अमेरिका से आने के बाद राहुल गांधी देश के एक प्रखर वक्ता के रूप में उभरे हैं। उनकी भाषण कला में अचानक से बदलाव आया है। जिस कारण लोग उन्हें सुनने भी लगे हैं। राजनीति में भाषण कला को महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय सियासत में कभी अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बेबाक वक्ता…
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यक्ष प्रश्न: जांच सीडी की होनी चाहिए या विनोद वर्मा की?
पत्रकारिता और राजनीति का रिश्ता बड़ा पुराना रहा है यह हम बहुत पहले से कहते आ रहे हैं। दोनों हॉरलिक्स और बॉर्नवीटा की तरह समकालीन रही हैं और समय-समय पर अपनी जात दिखाती रहीं हैं। पहले के विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों की बातूनी भाषा में पत्रकारिता और राजनीति के बारे में बड़े शुद्ध विचार रहे थे।…
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गुजरात चुनाव: क्या विकास सच में बौराएगा?
बेइमानी करके ही सही, मेरा मतलब है जहांपनाह के सजदे में सर झुकाते हुए केचुआ यानि केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। गुजरात की 182 सीटों पर दो चरणों में मतदान की घोषणा की गई। पहले चरण का चुनाव 9 दिसंबर (89 विधानसभा सीटों के लिए) जबकि दूसरे चरण का चुनाव 14 दिसंबर (93 विधानसभा सीटों के लिए) को होगा। राजनीतिक धुरंधर इसे 2019 लोकसभा…
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फिल्मों को राजनीतिक अखाड़े में खींचना कितना जायज?
तमिल के सुपरस्टार विजय की पिछले दिनों रिलीज़ हुई फ़िल्म मर्सल (mersal) को लेकर खड़ा हुआ विवाद पूरा राजनीतिक रंग ले चुका है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, ऐटली के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म चिकित्सा में व्याप्त भ्रष्टाचार के गंभीर मुद्दे पर बनायी गयी है और यह फ़िल्म भारत और विदेशों में…
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भगोड़े बने थे भाजपाई अब हालत धोबी के कुत्ते जैसी
राजनीति में दल बदलना कोई बड़ी बात नहीं। पिछले साल से तो यह अब हर विधानसभा चुनाव में देखने को मिल जाता है। यहां वो कहावत बड़ी फिट बैठती है ‘जहां खीर वहीं फिर’ पर कभी कभार ऐसे लोगों की हालत धोबी के कुत्ते जैसी हो जाती है यानी न घर का, न घाट का।…
