गौतम नवलखा

किसका है डर, जो गौतम नवलखा केस छोड़ रहे हैं ‘मी लॉर्ड’?

सामाजिक कार्यकर्ता और नक्सलियों से संपर्क रखने के आरोपी गौतम नवलखा की याचिका ने सुप्रीम कोर्ट के छक्के छुड़ा दिए हैं। न्याय व्यवस्था को ‘सुचारु’ रूप से चलाने बैठे सुप्रीम कोर्ट के जज इस मामले की सुनवाई से पीछे हट रहे हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत कुल 5 जज अबतक सुनवाई से हट चुके हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इन सभी ने सुनवाई से अलग होने का कोई कारण नहीं बताया है।

दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर गौतम नवलखा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर को रद्द करने के लिए लिए नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले 13 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी केस रद्द किए जाने की मांग ठुकरा दी थी।

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अब तक पांच जजों ने पीछे खींचे कदम

हाई कोर्ट से राहत ना मिलने के बाद गौतम नवलखा ने 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सबसे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया और कोई कारण भी नहीं बताया। इसके बाद मामला जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्ट्टीस एन वी रमना के पास गया। ये तीनों ही जज मामले की सुनवाई से अलग हो गए। अब मामला जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस विनीत सरण और जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट की बेंच के सामने पेश हुआ तो जस्टिस रवींद्र भट्ट पीछे हट गए।

न्याय व्यवस्था में इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि जज सुनवाई करने से पीछे हट रहे हैं। गौतम नवलखा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी के मुताबिक, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट कभी बतौर वकील ‘पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स’ की तरफ से पेश हुए थे, जिससे नवलखा जुड़े हुए हैं। ऐसे में हो सकता है कि इसी कारण जस्टिस भट्ट ने याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। हालांकि, बाकी जजों का इस तरह से केस से हट जाना समझ से परे है।

आखिर भीमराव आंबेडकर की विचारधारा क्या है?

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