ख़बर प्यार की नज़र से

ख़बर को समझना हो तो प्यार की नज़र से समझो जैसे ऐसे,

क्या बात है आज कल तुम खाली फ़ोन पर ही बात करती हो जबसे मिलने का वादा किया है तुमने, जैसे मोदी जी 50 दिन होने पर बस मन की बात करते है,
प्यार में ऐसे नही चलता तुम्हे मुझे सुनना होगा, अगर प्यार में लोकतंत्र कायम रखना है तो.
तुम तो बगावत पर उतर आये हो जैसे आज कल बाप बेटे की बगावत पर उतर आया है, वो ड्रामा कर रहे है और प्यार अपनी प्यार वाली पार्टी को सच्च में बचाना चाहता हूँ.
हम भी न अपने प्यार में वैलेंटाइन वाले बजट को मिला देते है सरकार भी अब रेल बजट साथ में लायेगी , अरे हम सरकार नही चला रहे हम प्यार चला रहे जो सरकार चलाने से भी मुश्किल है.
देखो नया सा करेगे नए साल के कुछ, देश की तरह सब पुराना लेकर नही बैठे रहेंगे, हम अपना प्यार ऐसे बढ़ाये जैसे देश में पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं.
देखो हम अपने प्यार को मारने नही देगे, हम अपने प्यार को अमर कर देगे जैसे ओमपुरी अमर हो गए, हमारा प्यार भी लोगो के दिल पर छाया रहेगा जाने के बाद भी.
हम अपने प्यार के फैसले मिल कर लेंगे नोट बंदी की तरह मन माने ढंग से नही लगे जिससे देश परेशान है हम अपने प्यार को परेशान नही करना चाहेंगे
देखो तुम मेरी इज़्ज़त करना देश की तरह ठरकी मत हो जाना, नही तो हमारे प्यार की हालत देश की लड़कियों जैसी हो जायेगी, जिसमे गलती न होने पर भी हमारे प्यार पर इलज़ाम लगेंगे.
अंत एक बात से जो थोड़ी कड़वी जरूर है – मर्दाना कमजोरी के इलाज पर रंगी हुई है शहरों की दीवारें और लोग कहते हैं औरतें कमज़ोर हैं!

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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