पॉलिटिकल लव: हाफ पैंट पहनकर नागपुर ना पहुंच जाना

चलो इंदौर चलते हैं
चलो लेकिन ध्यान देना कहीं नागपुर न पहुँच जाओ
अरे, चिंता मत करो हम इंडिगो से नहीं जा रहे
वैसे नागपुर भी बुरा नहीं अब तो वहाँ पैंट भी पहनने लगे हैं
पैंट पहनने से विचार नहीं बदलते साहब!

तुम मुझे क्या गिफ्ट करोगे?
मैं तुम्हें भगवत गीता गिफ्ट करने की सोच रहा हूँ,
ठीक है लेकिन हरियाणा वाली होनी चाहिए गीता,
चिंता मत करो वहीं से मंगाई है।

चलो प्यार के पोस्टर छपवाते हैं।
छपवा तो लो लेकिन मुझे रावण मत बना देना तुम,
अरे चिंता मत करो मैं तुम्हें राम बना दूँगी बस खुश!
अरे ना बाबा ना मैं जो हूँ बस वही रहने देना।

प्यार में कुछ काम करना हो तो कितने दिन में करोगे?
बस 2 दिन में कर दूंगा सब।
मुझे लगा साल भर में एक काम करोगे।
तुम भी सरकार की तरह मुझे ढीला समझ लेती हो।

तुम मेरी बात नहीं सुनती हो,
तो जाओ तुम भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लो।
अरे उस से भी क्या फायदा पता चला बाद में मुझे ही गलत बना दो,
अरे चिंता मत करो मैं मीडिया जैसा करूँगी।

आज कल कितनी लड़ाई होती है हम दोनों में,
हां, सही बोल रही हो ऐसा लगता है प्यार में प्यार ही नहीं रहा।
बस-बस ये हरियाणा नहीं है और यहाँ प्यार भी है और तकरार भी।
और यहाँ तो सरकार भी है तुम्हारी मेरी जान।

अब वक्त आ गया है कि हम अपने प्यार पर ध्यान दें।
चलो सही है वक़्त रहते ध्यान आ गया तुम्हें, नहीं तो प्यार की हालत भी किसानों जैसी हो जानी थी।
हां तो मैं सरकार थोड़ी न हूँ जो हरदम सोती रहूं,
चलो फिर कुछ नीति बनाओ सुधार करने की,
नीति तो नीति आयोग बनाता है हम सीधा काम करेंगे।

चलो हम और तुम विदेश चलते हैं।
अरे बताओ कब चलना है अभी चलें क्या
चल तो रहे है लेकिन वहां से चम्मच मत चुरा लेना
अरे इतने भी गरीब पत्रकार नहीं हैं हम

लव लेटर अब प्यार का प्रूफ नहीं रहा
क्यों पासपोर्ट जैसे बदलाव आ गए क्या इसमें भी
हां, और अब लव लेटर में नाम भी नहीं लिखना है ओके
ठीक है सरकार, लगता है साहब की सरकार को बुरी तरह से फॉलो कर रही हो

चलो किसी ठंडी जगह चलते है दिल्ली में तो अब ठंड नहीं रही
चलो फिर जल्दी से लोकल डिब्बा पकड़ लेते है
हां ये सही है तुम अपना पॉलिटकल लव लिखते चलना
फिर हम ठंडी जगह पहुँच कर पॉलिटकल लव का मज़ा लेंगे

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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