Breaking News |

Tag: राजनीति

  • राहुल गांधी अबकी कांग्रेस से परिवारवाद खत्म करवा ही देंगे?

    कांग्रेस लंबे समय से अनिश्चितिता के दौर से गुजर रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। महीनों मान-मनौवव्वल के बाद भी वह नहीं माने तो फिर से सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बना दिया गया। पार्टी के उसी बोरिंग काम करने के…

  • मायावती की खोई जमीन पर पार्टी बना लेंगे चंद्रशेखर आजाद?

    मायावती की खोई जमीन पर पार्टी बना लेंगे चंद्रशेखर आजाद?

    मायावती बड़ी नेता हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ी नेता थीं। इतनी बड़ी नेता थीं कि अपने बलबूते कई चुनाव जीते। लेकिन अब उनका चार्म जाता रहा। बदलता समय कहें या फिर राजनीतिक के स्टाइल में बदलाव। मायावती धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो रही हैं। उनके वोटर्स (ज्यादातर दलित वर्ग के वोटर्स) को 2017 में मोदी जी…

  • केजरीवाल जी, अब जनता से चंदा मांगकर प्रशांत किशोर को देंगे?

    केजरीवाल जी, अब जनता से चंदा मांगकर प्रशांत किशोर को देंगे?

    आम आदमी पार्टी। खुद को गरीब बताने वाली पार्टी अब पैसे देकर प्रचार करवाएगी। 2013 और 2015 में ‘आप’ के कार्यकर्ता उसकी ताकत थे। सड़क पर झाड़ू लिए खड़े थे। सिर पर टोपी लगाए खड़े थे। अपने पैसे लगाकर दिनभर प्रचार कर रहे थे। लेकिन अब ‘आप’ के पास पैसा है। जाहिर है ये पैसे…

  • नागरिकता कानून: शरणार्थियों के प्रति दया नहीं यह ख़ालिस राजनीति है

    बहुमत के दम पर मोदी सरकार ने एक और मनमानी कर डाली है। नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 अब कानून बन गया है। लोकतंत्र में मजबूत सरकार का नुकसान क्या है, यह हमें देखने को मिल रहा है। इससे पहले इंदिरा गांधी को भी मजबूत सरकार मिली थी। इंदिरा और संजय गांधी ने भी जमकर ‘मजबूत…

  • बिहार परिवहन: जाति की गाड़ी और ‘सुशासन’ का पहिया

    बिहार परिवहन: जाति की गाड़ी और ‘सुशासन’ का पहिया

    आजादी के इतने सालों के बाद भी व्यवस्था लाख दावे करे लेकिन वह जाति व्यवस्था को कमजोर नहीं कर सकी है। अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए तो व्यवस्था ही जाति आधारित राजनीति की अप्रत्यक्ष रूप से पोषक है। समय के साथ यह व्यवस्था धीरे-धीरे विघटनकारी होती जा रही है। दुर्भाग्य से यह देश के…

  • प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

    प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

    प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।

  • इंसानों को मार और गायों को मरता हुआ छोड़ रहे ‘गौरक्षक’

    इंसानों को मार और गायों को मरता हुआ छोड़ रहे ‘गौरक्षक’

    आज कल पूरे देश भर में एक ‘भय’ का माहौल बन रहा है। भीड़ आती है, आप पर कोई आरोप लगाती है और बिना न्याय व्यवस्था का सहारा लिए खुद न्याय करने लगती है। आप पर ‘लंच’ में बीफ खाने का आरोप लगाकर आपकी ‘लिंचिंग’ कर दी जाती है। तथाकथित गौ भक्त अब देश भर…