राहुल गांधी अबकी कांग्रेस से परिवारवाद खत्म करवा ही देंगे?

कांग्रेस लंबे समय से अनिश्चितिता के दौर से गुजर रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। महीनों मान-मनौवव्वल के बाद भी वह नहीं माने तो फिर से सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बना दिया गया। पार्टी के उसी बोरिंग काम करने के तरीके और राहुल गांधी के सक्रिय ना होने के कारण कई कांग्रेस अब फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो रहे हैं। कुछ नेता अभी भी चाहते हैं कि राहुल या प्रियंका गांधी में से ही कोई पार्टी संभाले। वहीं, कुछ चाहते हैं कि पार्टी में बदलाव हो और गांधी परिवार से बाहर का कोई शख्स पार्टी की कमान संभाले।

राहुल गांधी ने भी इस्तीफा देने के बाद से यह स्पष्ट रखा है कि वह दोबारा कमान नहीं संभालने वाले हैं। प्रियंका गांधी में उम्मीद देखने वालों को भी निराशा हाथ लगी, जब खुद प्रियंका ने कह दिया कि अब गांधी परिवार से बाहर का कोई अध्यक्ष बने। मुकुल वासनिक जैसे कुछ नामों पर चर्चा के बीच ही अब कांग्रेस के एक गुट ने ‘चिट्ठी बम’ फोड़ दिया। इन नेताओं की मांग है कि पार्टी को पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व मिले।

लोकल डिब्बा को फेसबुक पर लाइक करें।

नरेंद्र मोदी के आगे टिक नहीं पाते हैं राहुल गांधी

चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में वे नेता शामिल हैं, जिन्होंने सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी को कभी उस लायक नहीं समझा। राहुल गांधी भी 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत देखकर यह स्वीकार कर चुके हैं कि परिवारवाद ही पार्टी का सबसे बड़ा दुश्मन है। कुछ अपनी हरकतों और कुछ मीडिया प्रोजेक्शन से राहुल गांधी की इमेज ‘पप्पू’ वाली ही बनी हुई है। वह कुछ अच्छा और ठोस भी कहते हैं तो वह चीज नरेंद्र मोदी की मीडिया मैनेज्ड इमेज के आगे टिकती नहीं है।

शायद यही कारण है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अब कांग्रेस पार्टी को परिवार से बाहर का कोई शख्स संभाले। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है। कांग्रेसियों ने अपना इतिहास देखा है। राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेस की हालत और अध्यक्षी के लिए हुए राजनीतिक ड्रामे को कुछ नेता दोहराना नहीं चाहते हैं। ऐसे में उनका मत है कि जो भी हो, जैसा भी हो, पार्टी और परिवार एक ही रहे।

कांग्रेस को राहुल गांधी की मासूमियत नहीं, सोनिया के तेवर ही चाहिए?

चाहकर भी परिवार और कांग्रेस पार्टी अलग नहीं हो सकते

खैर, राहुल गांधी ना चाहते हुए भी अपनी मर्जी ही थोपने की कोशिश करेंगे। सोनिया गांधी चाहकर भी रिटायरमेंट ले नहीं पा रहे हैं। कांग्रेसी चाहकर भी परिवार की छतरी से बाहर नहीं आना चाहते। और कांग्रेस पार्टी चाहकर भी अपने ‘चेहरों’ के आवरण से निकलकर नए चेहरे बनाने की ओर बढ़ नहीं पा रही है। आखिर में देखना रोचक होगा कि कांग्रेस में पार्टी और परिवार अलग होता है या हमेशा की तरह अंत में पार्टी को परिवार ही चलाता है।

इस लेखक के और लेख

सुशांत सिंह केस

सुशांत केस में अतिवादी रिपोर्टिंग लोगों को बेवकूफ बना रही है?

mahendra singh dhoni

महेंद्र सिंह धोनी: किस फॉर्मैट में खेले कितने मैच और बनाए कितने रन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

June 2026
S M T W T F S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930