26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस?

आज हमारे देश का 72वां गणतंत्र दिवस है. 15 अगस्त 1947 को आजादी तो मिली लेकिन 26 जनवरी 1950 तक हमारे पास खुद का संविधान नहीं था. आजादी भले ही 15 अगस्त 1947 को मिली लेकिन इसकी भूमिका काफी पहले से बनने लगी थी.

तय किया गया कि नया भारत अपने नए संविधान के हिसाब से चलेगा. 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई. इसी संविधान सभा की जिम्मेदारी थी नया संविधान तैयार करना. 26 नवंबर 1949 को इस सभा की आखिरी बैठक हुई. यानी कुल दो साल 11 महीने और 18 दिन में हमारा संविधान तैयार हो गया. हमारा संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है.

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संविधान तो 2 महीने पहले ही तैयार था

अब आप ध्यान दें कि 26 नवंबर को 1949 को ही संविधान बनाने का काम पूरा हो गया था, लेकिन दो महीने तक इसे लागू नहीं किया गया आखिर ऐसा क्यों? 

साल 1930 से पहले ही कांग्रेस की गतिविधियां तेज हो गई थीं. 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पंडित जवाहर लाल नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया. इसी दिन पूर्ण स्वराज यानी आजादी की मांग की गई. तमाम क्रांतिकारियों ने फैसला लिया कि जनवरी के आखिरी रविवार को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा. यह तारीख थी 26 जनवरी 1930. इस दिन पंडित नेहरू ने लाहौर में रावी नदी के किनारे तिरंगा झंडा लहराया.

खास है 26 जनवरी की तारीख

बाद में जब भारत का संविधान तैयार हो चुका था. तब भी संविधान को लागू करने के लिए यही 26 जनवरी की तारीख चुनी गई. यही कारण है कि 26 नवंबर 1949 को संविधान तैयार हो जाने के बावजूद दो महीने का इंतजार किया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया. 

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यह संविधान ही देश में सबसे ऊपर है. देश की हर गतिविधि संविधान के मुताबिक ही चलती है. हमारा संविधान लचीला रखा गया है, जिससे परिस्थितियों के हिसाब से उसमें बदलाव भी किए जा सकें.

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