Category: नेशनल
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हाथरस केस: इन सवालों के जवाब शायद कभी नहीं मिलेंगे
हाथरस कांड. हत्या, रेप या हॉरर किलिंग? लगातार कई दिनों से जारी इस विवाद ने सबसे ज्यादा नंगा सिस्टम को किया है. जैसा फिल्मों में देखा जाता है, ठीक वही गुंडई. पहले तो केस दर्ज करने में लापरवाही. फिर इलाज में लापरवाही. आरोपियों की धर-पकड़ में लापरवाही. पीड़िता की मौत के बाद तो बेशर्मी शुरू…
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बेशर्मो, एक और रेप हुआ है, फिर हमदर्दी दिखाओ और भूल जाओ
एक और वीभत्स बलात्कार. अबकी उत्तर प्रदेश के हाथरस में. वही यूपी जहां कथित ‘राम राज्य’ आ चुका है. आखिर उस लड़की की मौत हो गई और हमारा रोष जाग उठा. दो हफ्तों से पुलिस यही साबित करने में लगी रही कि कुछ हुआ ही नहीं. दुर्भाग्य है कि उस लड़की की मौत के बाद…
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मिसगाइडेड मिसाइल हो चुके किसानों को है अपने नेता की जरूरत
किसान अकसर आंदोलन करते हैं. इन आंदोलनों की गति दिशाहीन होती है. चंद लोग किसानों के नाम पर समझौता कर लेते हैं. आखिर में किसानों को बैरंग लौटना पड़ता है.
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सुशांत केस में अतिवादी रिपोर्टिंग लोगों को बेवकूफ बना रही है?
मीडिया के विद्यार्थियों को बुलेट थियरी पढ़ाई जाती है। इसमें होता कुछ यूं है कि एक ही चीज आपको इतनी बार दिखा दी जाए कि आप इसे सच मानने लगें और उससे प्रभावित हों। अच्छी पहल या नेक कामों को इस तरह दिखाया जाए तो बड़ा बदलाव भी आ सकता है। दुर्भाग्य है कि हमारे…
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केरल प्लेन क्रैश: हादसे के बाद ही क्यों जागते हैं हम?
हादसों से घिरे हम भारतीय कुछ दिनों तक तो ढोंग करते हैं लेकिन पहले से तैयार नहीं रहना चाहते। मसलन केरल में हुए विमान हादसे को ही देखिए। कोझिकोड एयरपोर्ट का रनवे बनाते समय यह बात तो जरूर ध्यान में रखी जानी चाहिए कि इसे टेबल टॉप न बनाया जाय। यह बात अब सबको याद…
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राफेल मिले, तकनीक नहीं… बड़े घाटे का सौदा है ये?
तकनीक ट्रांसफर न होने से भारत को इस सौदे में आर्थिक, रणनीतिक, सुरक्षा, तकनीक जैसे कई मोर्चों पर घाटा ही हुआ, यह साफ हो जाता है.
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आर्टिकल 370 भी नहीं रहा, आखिर कब बंद होगी कश्मीरी पंडितों की हत्या?
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हो चुका है। रास्ते का रोड़ा माना जाने वाला अनुच्छेद 370 भी प्रभावी नहीं है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब केंद्र शासित है। ये सभी शर्तें वह हैं, जो किसी भी केंद्र सरकार के लिए सबसे फेवरेबल हैं। इसके बावजूद भी कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और अन्य नागरिकों की हत्या हो…
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कोरोना: क्या भारत में फिर से लॉकडाउन लागू करना पड़ेगा?
कोरोना कंट्रोल में नहीं है। हर दिन मामले बढ़ रहे हैं और लॉकडाउन फिर (again lockdown) से बढ़ने की आशंका भी। दिल्ली, मुंबई और कई महानगर खतरे में हैं। इस सबके बावजूद ‘इकॉनमी’ चलाने के लिए लॉकडाउन खत्म हो गया है। सरकार दोतरफा फंसी है। उसे लोगों की जान भी बचानी है। दूसरी तरफ इकॉनमी…
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टीवी न्यूज ने कोरोना खत्म कर दिया है, जनता अपनी जान बचाए
मार्च का महीना था। कोरोना के डर से लोग कांप गए थे। पहले स्कूल-कॉलेज बंद हुए। दफ्तर बंद होने लगे। आखिर में रेल और हवाई सेवा रोक दी गई। अब आलम यह है कि सबकुछ खुल गया है। ठहरिए! कोरोना खत्म नहीं हुआ है। बस टीवी मीडिया ने इसका हाइप बनाना बंद कर दिया है।…
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बच्चों की मौत पर गंभीर क्यों नहीं होतीं सरकारें?
सरकारों ने हर बार बेशर्मी दिखाई है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वहां इनके अपने बच्चों को कुछ नहीं हो रहा है. अगर कुछ होता तो शायद कुछ करते, जिससे बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल पाता.
