घुटता है दम-दम, घुटता है दम-दम, घुटता है दम-दम दिल्ली में

हमने विकास के लिए जिंदा शहरों को कब्रिस्तान में बदलने में की पूरी तैयारी कर ली है.

युद्ध अपरिहार्य न हो तो गांधी वक़्त की ज़रूरत हैं

भारत में किसी की भी सरकार आए......गांधी को पूजना उसकी मजबूरी है, लेकिन उनके सिद्धातों को अपनाना नहीं. कोई अपना…

वंदेमातरम् विवाद: बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय जीवित होते तो माथा पीट लेते!

वंदे मातरम की रचना करते समय बंकिम चंद्र चटोपध्याय ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनकी इस…

एनकाउंटर वाले ज़माने में ‘गांधी’ ने देश से मुंह फेर लिया है

जिस देश में मौत का उत्सव मनाया जाता हो, जहां एनकाउंटर को गर्व के साथ उपलब्धि के रूप में विधानसभा…

बर्थडे स्पेशल: फुटबाल को शिखर पर लाने को बेताब सुनील छेत्री

‘हमें गालियां दो, आलोचना करो लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम को खेल देखने स्टेडियम में आओ'

यह तस्वीर हमारी असंवेदनशीलता का जीता-जागता स्मारक है!

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। जिसमें एक लगभग बूढ़ा हो चूका व्यक्ति एक महिला को साइकिल…

‘कप्तान खान’ अगर ‘फौजी खान’ नहीं बने तो पाकिस्तान का बदलना तय!

पाकिस्तानी राजनीति का इतिहास उठा कर देखें तो सिर्फ गिने चुने नाम आएंगे जो जननेता के रूप में उठकर पाकिस्तान…

ओम फिनिशाय नमः महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट के कप्तान नहीं लीडर हैं!

धोनी से पहले विश्व क्रिकेट के बहुत बड़े बड़े फिनिशर भी हुए, जिनमें लांस क्लूजनर, माइकल बेवन जैसे दिग्गज नाम…

बदनाम ही सही लेकिन गुमनाम नहीं हूं मैं: मंटो

विभाजन और विभाजन से होने वाले दंगे का मंटो पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था. इस त्रासदी को मंटो के…

क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?

लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब…

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