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कविताईः नए बरस की आमद और रद्दी होते कैलेंडर का दर्द
बरस के बीतते इन आखिरी दिनों में/ कैलेंडर की अहमियत घट रही है।
इस तरह सिर्फ सियासत बचेगी और इंसाफ मर चुका होगा
पाकिस्तान के कितने हाथ हैं जी? हर जगह पहुंच जाते हैं, कोई सरकार हार जाए या कोई घटना हो जाए…
सुषुप्त ज्वालामुखी होते जा रहे हैं महेंद्र सिंह धोनी
महेंद्र सिंह धोनी के लिए, माही मार रहा है जैसे नारे आम होते थे लेकिन अब यही नारे उनको ट्रोल करने के कारण बन गए हैं.
