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  • जाते-जाते हंसने का पैगाम देकर चली गईं श्रीदेवी

    जाते-जाते हंसने का पैगाम देकर चली गईं श्रीदेवी

    किसी शायर ने ठीक ही कहा है- ज़िंदगी क्या है फ़कत मौत का टलते रहना.   वक़्त कई बार इसका एहसास भी करा देता है. सांसे कब, किसकी कितनी देर टिकी रहेंगी इसका अंदाजा न सांस लेने वाले को होता है न ही साथ रहने वाले को. कुदरत है, कुछ रहस्यों पर उसका एकाधिकार है…