Tag: हिंदू गजल

  • जहाँ हक माँगना मजलूम की फरियाद लगती है

    जहाँ हक माँगना मजलूम की फरियाद लगती है

    बता दे ये जमीं कैसे तुझे आजाद लगती है जहाँ हक माँगना मजलूम की फरियाद लगती है। कि जिनको है चुना हमने हमारी सरपरस्ती को हमें उनकी ही नियत अब बडी नाशाद लगती है । है जिसके आँखों पे पट्टी, कि जो इन्साफ करती है वो देवी अब मुझे धृतराष्ट्र की औलाद लगती है। परिंदा…