साल 2010 की बात है। तब पर्सनल फोन का चलन नहीं हुआ करता था। घर में इकलौता नोकिया का सेट था, जो पूरे दिन मोबाइल स्टैंड में पड़ा रहता। फोन आता तो माँ उठातीं, प्रेरणा से बात करनी है आंटी, यह सुनकर वो फोन मेरी तरफ बढ़ाती थी। चूंकि हमें फोन उठाने की इजाज़त नहीं…