Category: विशेष
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मालगुडी डेज: कहानियों का वह शहर जो भुलाए नहीं भूलता
अगर आप भी 80-90 के बीच पैदा हुए हैं तो आपका बचपन भी टीवी पर मालगुडी डेज़ देखते हुए बीता होगा। मालगुडी डेज की कहानियां एकदम काल्पनिक होती थीं लेकिन देखते वक़्त आप उस कहानियों में ऐसा खो जाते थे कि लगता था मानो सब सच ही हो। मुझे एक कोट वाली कहानी याद है…
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हैप्पी विमेंस डे (नियम व शर्तें लागू)
ब्रा, ब्रेस्ट और पीरियड्स की बात पर हम अचानक अपने आँख कान नाक खोल कर बैठ जाते हैं| फ्रीडम ऑफ़ स्पीच और फेमिनिज्म आजकल का हॉट टॉपिक है| ज़रा सा लड़कियों को घर टाइम पर आने को कहिये या कहिये की अपनी आरक्षित सीट पर किसी जरूरतमंद बूढ़े को बिठा दें, तो देखिये इन लोगों…
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संसद में नहीं हूँ, झख मार रही हूँ : तारकेश्वरी सिन्हा
एक बार डॉक्टर राम मनोहर लोहिया संसद में स्टालिन की बेटी स्वेतलाना को भारत में शरण दिए जाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस सांसद तारकेश्वरी सिन्हा ने कहा, “लोहिया जी आप तो बैचलर हैं, आपने शादी नहीं की, आपको औरतों के बारे में क्या मालूम।“ लोहिया जी तपाक से बोले, “तारकेश्वरी तुमने मौका ही…
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कैसे बनी ‘खूनी’ रेडक्लिफ लाइन?
कुछ 12 से 13 घर होंगे उस रेडक्लिफ़ लाइन पर, जिसके घर का आंगन तो बंगाल में है पर छत का छज्जा बांग्लादेश में पड़ जाता है। हर रोज वाघा बॉर्डर पर तल्ख तेवर दिखाते हुए हिंदुस्तान और पाकिस्तान के जवान अपने झंडे को सलाम कर सूरज ढलते ही एक दूसरे के मुंह पर गेट…