Category: विशेष

  • छठ पूजा: उत्तर भारत का ग्रेट कार्निवाल
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    छठ पूजा: उत्तर भारत का ग्रेट कार्निवाल

    बिहार का महापर्व छठ जिसे आज भारत के बहुत से राज्यों में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है, उसकी शुरुआत हो चुकी है। दीवाली के छठवें दिन से शुरू होने वाला यह महापर्व बिहार का सबसे बड़ा और प्राचीन पर्व है। इस पर्व में सूर्य की आराधना की जाती है। माना जाता है कि भगवान…

  • ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है: साहिर लुधियानवी
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    ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है: साहिर लुधियानवी

    विभाजन के बाद साहिर ने हिंदुस्तान छोड़ दिया और पाकिस्तान चले गए। उस दौर के मशहूर फिल्म निर्देशक थे ख्वाजा अहमद अब्बास। अब्बास साहिर के दोस्त थे। साहिर के जाने से दुखी भी थे इसलिए उन्होंने इंडिया वीकली नाम के मैगजीन में साहिर के नाम खुला पत्र लिखा और उन्हें यह एहसास दिलाया कि जब…

  • पटाखों और कोर्ट की लड़ाई से हटके एक अलग सी दिवाली!

    पटाखों और कोर्ट की लड़ाई से हटके एक अलग सी दिवाली!

    छोटी दीपावली की सुबह जब मैं उठा तब सामने सुबह वाली चाय थी, चाय की चुस्की लेते हुए मन में कुछ बातें चल रही थी, वो बातें थी इस दीपावली को कुछ खास बनाने की। अचानक से मन में ख़्याल आया कि मेरे बहुत से मित्र दिल्ली में ज़रूरतमंदों की मदद कर रहे हैं तो क्यों…

  • काली पन्नी के पीछे छुपा दर्द!
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    काली पन्नी के पीछे छुपा दर्द!

    माँ क्यों कहती हो मत छूना उस काली पन्नी को? क्या छुपा है माँ उस काली पन्नी में? क्यों नहीं बताती माँ क्या ले आती हो उस काली पन्नी में? क्या लपेटा है उन कागजों के बीच उस काली पन्नी में? माँ तुम अचार देना बंद कर देती हो घर में आते ही उस काली…

  • बर्थडे स्पेशल: उस्ताद नुसरत फतेह अली खान
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    बर्थडे स्पेशल: उस्ताद नुसरत फतेह अली खान

    अगर मौसिकी में सूफी कलाम और कव्वालियों को शामिल ना किया जाए तो संगीत का पूरा ताना बाना अधूरा सा लगने लगेगा. पिछले कुछ समय से एक गीत को कई तरीके से बदल बदल कर गाया जा रहा है. कहीं उसका रीमिक्स चल रहा होता है, तो कहीं किसी फिल्म में वही गीत नए तरीके…

  • इश्क को गजल से आबाद करने वाले जगजीत सिंह

    इश्क को गजल से आबाद करने वाले जगजीत सिंह

    गजल गायकी का वह सितारा जिसने अपनी आवाज से करोड़ों दिल जीते। उनके द्वारा गायी गईं गजलें लोंगो के होंठो से गुड़ की तरह चिपक गईं। आपने नुशरत फतेह अली खान को सुना? नहीं सुना! कोई बात नहीं! बेगम अख्तर को तो सुना ही होगा? इनको भी नहीं सुना तब भी कोई बात नहीं! आपने…

  • हम अपनी नाकामी फतवा के पीछे क्यों छुपा रहे हैं?
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    हम अपनी नाकामी फतवा के पीछे क्यों छुपा रहे हैं?

    अभी इस साल में काफी दिन बाकी हैं फिर भी इस साल की भारतीय उपलब्धियों की सूची उठाकर देखें तो हमेशा की तरह सूची में आधे से ज्यादा नाम आधी आबादी की नुमाइंदगी करने वाली लड़कियों या महिलाओं के हैं. चाहे हाल ही की कोई घटना उठा लें या चार पांच महीने पहले की कोई…

  • गांधी को पूजना आसान है, उनके रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल

    गांधी को पूजना आसान है, उनके रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल

    भारत का एक वर्ग बिना परिस्थितियों की जटिलता और सच्चाई को समझे महात्मा गांधी को ही भारत-पाकिस्तान विभाजन का कारण मानता है और मानता रहेगा। इसी सोच का नतीजा है कि गांधी जी की हत्या कर दी गई थी। जबकि गांधी तो हमेशा नेहरू और सरदार पटेल को समझाते रहे कि विभाजन की बात मत…

  • महात्मा गांधी का जीवन-दर्शन है हिंद स्वराज
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    महात्मा गांधी का जीवन-दर्शन है हिंद स्वराज

    हिन्द स्वराज को गाँधी के विचारों का ब्लू प्रिंट माना जाता है |अगर आप गाँधी के विचारों और सिद्धांतों से परिचित होना चाहते है तो हिन्द स्वराज सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है| यह संवाद शैली में लिखी गयी एक ऐतिहासिक कृति है जिसमें एक समाचार पत्र के संपादक और पाठकों के बीच संवाद को दिखाया गया…

  • त्योहार नहीं मातम का दिन है मुहर्रम

    त्योहार नहीं मातम का दिन है मुहर्रम

      इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन है. आज भी उनके अनुयायी इस दिन शोक मनाते हैं, काले कपड़े पहनते हैं और मातम करके रोते हैं। ताज़िया जो हर शहर गाँव में आज शाम उठाया जाएगा, यह एक निशानी है कि जिस…