Category: साहित्य
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हिंदी पत्रकारिता दिवस: जानें कैसे शुरू और बंद हुआ उदंत मार्तंड
सिद्धार्थ पांडेय30 मई 1826 भारतीय इतिहास की वह स्वर्णिम तारीख है जब भारत में हिंदी पत्रकारिता की नींव पड़ी। भारत के पहले हिंदी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन 195 साल पहले आज ही के दिन कलकत्ता में हुआ था, जिसके प्रकाशक थे पंडित जुगल किशोर शुक्ला। तब से आज के दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस…
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मॉब लिंचिंग: साधु मरे या मजदूर, समाज बुरी तरह फेल हो रहा है
तीन दिन पहले की खबर है। महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ ने तीन लोगों को घेरा। बुरी तरह पीटा। सूचना मिली तो पुलिस आई। पुलिस के सामने भी सैकड़ों ने तीनों को पीटा। तीनों की मौत हो गई। बताया गया कि भीड़ ने तीनों को इस शक में पीटकर मार डाला कि उसे शक भर…
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रामधारी सिंह दिनकर युद्ध की संभावना पर क्या कहते?
दिनकर व्यक्ति नहीं रहे। दिनकर एक चेतना हैं। एक राष्ट्र की चेतना। केवल भारत की नहीं, किसी भी स्वाभिमानी राष्ट्र की चेतना। वह वीर रस के कवि माने गए लेकिन उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति उसे मानी गई जिसमें उन्होंने प्रेम लिखा।
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‘ये रंग होगा कितना गहरा कितना हल्का, ये अफसर तय करेंगे’
किसी का हुक्म है सारी हवाएं, हमेशा चलने से पहले बताएं, कि इनकी सम्त क्या है. हवाओं को बताना ये भी होगा, चलेंगी जब तो क्या रफ्तार होगी, कि आंधी की इजाज़त अब नहीं है. हमारी रेत की सब ये फसीलें, ये कागज़ के महल जो बन रहे हैं, हिफाज़त इनकी करना है ज़रूरी. और…
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पुण्यतिथिः ‘आसमान में धान’ की तरह उगने वाले कवि विद्रोही
“मैं किसी से प्रतिवाद नहीं करता तो उसका सिर्फ एक कारण है। मैं इस इंडियन सोसायटी का नेचर जानता हूं। यह एक बास्टर्ड सोसायटी है जो न कवि को इनाम देती है और न दंड।” नीतिन पमनानी की फिल्म ‘मैं तुम्हारा कवि हूं’ में बोलते हुए विद्रोही इस बात से कतई अनजान तो नहीं रहे…
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दंगों के बीच जूझती एक प्रेम कथा, सत्य व्यास की ‘चौरासी’
किताब में चार किरदार हैं. मुख्य किरदार का नाम ऋषि है. ऋषि भी दंगों से ही सम्बंधित है. ऋषि जिस लड़की से प्रेम करता है, उस लड़की और उसके परिवार को बचाने में वह लड़का खुद किस कदर दंगाई हो जाता है, इस किताब में वही दर्शाया गया है
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अग्नि वर्षा है तो है हां बर्फ़बारी है तो है
दुष्यंत चले गए. उनकी ग़ज़लें अमर हैं. जिन्होंने दुष्यंत कुमार को नहीं देखा, वे एहतराम साहब से मिल सकते हैं. एहतराम इस्लाम, हिंदी ग़ज़ल के चर्चित चेहरे हैं. देश भर लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनकी ग़ज़लें प्रकाशित हो गई हैं. ग़ज़ल में हिंदी का जैसा प्रयोग एहतराम साहब ने किया है वैसा कहीं और…
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न करीब आ न तू दूर जा ये जो फ़ासला है ये ठीक है
ग़ज़ल की ख़ूबसूरती है कि यहां बातें छिपाकर कही जाती हैं. जो जाहिर है ऐसा माना जाता है वह ग़ज़ल नहीं. भवेश दिलशाद इससे इनकार करते हैं. भवेश कहते हैं कि ग़ज़ल समझ न आए तो क्या ख़ाक ग़ज़ल? पढ़िए, शायर भवेश दिलशाद की ग़ज़ल, ”जो फ़ासला है ये ठीक है.” न करीब आ न…
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आसमान वालों को गीत सुनाने चले गए महाकवि गोपाल दास नीरज
नीरज साहब की मानें तो “न जन्म कुछ, न मृत्यु कुछ, बस इतनी सी बात है, किसी की आंख खुल गई, किसी को नींद आ गई।” लेकिन यह इतना भी सामान्य नहीं है। यह हृदयविदारक है कि आज नीरज को नींद आ गई। तकरीबन एक सदी के अंतिम छोर तक की यात्रा तय कर चुके…
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पुण्यतिथि: तमस के बहाने भीष्म साहनी का स्मरण
‘तमस’ देश-विभाजन के पूर्व की हमारी सामाजिक मानसिकता और उसके अनिवार्य परिणाम के रूप में होने वाले भीषण साम्प्रदायिक दंगो की निर्मम करूण गाथा को चित्रित करने वाला महत्वपूर्ण उपन्यास है. इसकी पृष्ठभूमि उस समय की है जब देश स्वतंत्रता के साथ विभाजन के दो राहे पर खड़ा था. अगर हम उस समय के ऐतिहासिक…