Category: साहित्य
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दुष्यंत कुमारः वह शायर जिसके शेर क्रांति के शंखनाद से कम नहीं
1933 के वक्त के भारत की बात करें तो आजादी का संग्राम और देशभक्ति से ओत-प्रोत साहित्य अपने पूरे उफान पर था। ऐसे माहौल में स्वातंत्र्योत्तर हिंदी साहित्य की आवाज में हिंदुस्तान की पीड़ा को गाने के लिए एक गीतकार का सृजन जारी था। बर्तानवी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह और हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास के…
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हैप्पी बड्डे: फिराक गोरखपुरी साहब
हर किसी की जिंदगी के समानांतर एक और जिंदगी होती है और यह सबको दिखाई नहीं देती । यह जिंदगी का एक दूसरा रंग होता है, जो किसी चित्रकार के कैनवास पर तस्वीरों की शक्ल में अपने होने की सूचना देता है, तो कभी किसी शाइर की शायरियों में प्रकट होकर अपने अस्तित्व का आभास…
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गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का
लो बना दिया तुम्हारे माथे पर चाँद जो तुम्हारी हसरत थी नहीं जानता कि यह प्रेम है या प्रेम में लिपटी हवस जो मैं बार-बार तुम्हारे क़रीब आता हूँ। तुम जानती हो कि मैं प्रेम नहीं करता लेकिन तुम्हारा यह मुझ पर बेशर्त कुर्बान होना मुझे बहका देता है और मैं छू लेता हूँ तुम्हारे…
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आपस में क्यों बैर करें सब?
हाथ एक से पांव एक से शहर एक से गांव एक से, एक सा चेहरा , एक सी सोच एक ही जीवन एक ही खोज, एक से हैं हम सारे फिर भी एक जैसे ना रहते लोग, एक जैसी सब बात हैं करते इक दूजे से सब ऐठे हैं, एक नदी में सफर है सबका…