लॉकडाउन में शराब मिलने के बाद पढ़ें बेवड़ों का इंटरव्यू

देश एक मुश्किल दौर से गुजर रहा हैं। हम सब नौकरी से लेकर जान तक गवां रहे हैंं लेकिन एक वर्ग ऐसा भी हैं, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगा हुआ हैं। वो अपने लड़खड़ाते हुए कदमों से अर्थव्यवस्था को सीधा खड़ा करने की कोशिश कर रहा हैं। जी हां, अब आप समझ ही गए होंगे कि हम बात कर रहे हैंं अपने इकोनॉमिक वॉरियर्स बेवड़ा संगठन की। ये आज किसी और के लिए नहीं बल्कि देश के लिए पी रहे हैंं। ये अपना सहयोग देश की अर्थव्यवस्था में कर रहे हैंं। अगर आप पी नहीं सकते तो कम से कम शाम 6 बजे 6 मिनट के लिए इनके नाम पर चखना ही खा लीजिए, इससे इन्हें प्रेरणा मिलेगी लेकिन ध्यान रखिए कि इतना भी चखना मत खा लेना आप लोग कि इन्हें नमक के साथ दारू पीनी पड़े। तो आप सहयोग की तरह बढ़िए और हम अब हम सवालों की ओर बढ़ते हैं।

 

लोकल डिब्बा को फेसबुक पर लाइक करें।

फलाने- नमस्कार बेवड़ा जी

बेवड़ा- नमस्कार फलाने जी

फलाने- आप दारू के लिए इतनी लंबी लाइन में क्यों लगे?

बेवड़ा- आप भी तो लगे थे 8 नवंबर के बाद, अपना भूल गए? हम अपने लिए नहीं देश के लिए लाइन में लगे हैं और ऐसे बलिदान देश के लिए देते रहेंगे।

फलाने- आप देश का कौन सा काम कर रहे हैं ऐसे?

बेवड़ा- हम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। क्योंकि पैसा होगा तभी तो आपकी सरकार चलेगी न कि बिना पैसे के चला लोगे आप।

फलाने- तो आपको हम देशभक्त बोलें?

बेवड़ा- नहीं फलाने जी, आप हमें इकॉनोमिक वॉरियर्स बोलो क्योंकि हम अर्थव्यवस्था को बचा रहे हैं। जैसे कोरोना वॉरियर्स देश को कोरोना से बचा रहे हैं बिल्कुल वैसे।

फलाने- लेकिन आप लोग लाइन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर हैं, ऐसा क्यों ?

बेवड़ा- या तो हम देश की अर्थव्यवस्था बचा लें या खुद की जान। अगर हम सब पालन करने लगे तो होश वाले क्या करेंगे और हम देश के लिए ये सब कर रहे हैं। तो आप इस पर सवाल नहीं उठा सकते समझ गए न। बेवड़ा संगठन राष्ट्रवादी है।

फलाने- लोग कह रहे हैं कि आपके पास दारू का पैसा है लेकिन टिकट का नहीं?

बेवड़ा- देखिए फलाने जी ऐसे तो मैं भी बोल सकता हूं, आपके पास मूर्ति के लिए पैसा है लेकिन गरीब के लिए नहीं।

फलाने- जब ठेके बंद थे, तब आप कैसे सहयोग करते थे?

बेवड़ा- वैसे ही जैसे ब्लैक मनी वाले पार्टी में चंदा देकर करते हैं, हम भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए ब्लैक में दारू लेते थे। 300 वाली 900 में और ये सब हम अपने लिए नहीं कर हैं फलाने जी बस देश के लिए कर रहे हैं।

फलाने- दिल्ली सरकार ने दारू पर 70% टैक्स लगा दिया तो अब आप क्या करेंगे?

बेवड़ा- टैक्स लग गया तो क्या अब देश की सेवा छोड़ दें? इस मरी हुई इकॉनमी को उठाना छोड़ दें? सुनिए फलाने जी चाहे टैक्स लगे या कुछ और हम देश सेवा नहीं छोड़ेंगे। हम देश की अर्थव्यवस्था के लिए 70% क्या 100% टैक्स लग जाए, तब भी दारू पियेंगे। ये बेवड़ा संगठन का वादा है आपसे।

फलाने- बेवड़ा जी दारू पीना तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है न?

बेवड़ा- तो सरकार ने ठेके क्यों खोले हैं? और दारू पीना भले ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए बहुत लाभदायक है। हम अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए जान की बाजी लगा देंगे।

तो आप इनकी मेहनत देख ही रहे हैं। मेरी तो आँखों से आसूं आ गए इनकी बातें सुनकर। इन्होंने हमें ये भी दिखा दिया कि ये बिना दारू के भी रह सकते हैं लेकिन सरकार बिना ठेके खोले नहीं रह सकती। ये अपनी जान पर खेलकर देश की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। आप इन लोगों का साथ दीजिए और अपने घरों में रहिए।