Tag: गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का

  • गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का

    लो बना दिया तुम्हारे माथे पर चाँद जो तुम्हारी हसरत थी नहीं जानता कि यह प्रेम है या प्रेम में लिपटी हवस जो मैं बार-बार तुम्हारे क़रीब आता हूँ। तुम जानती हो कि मैं प्रेम नहीं करता लेकिन तुम्हारा यह मुझ पर बेशर्त कुर्बान होना मुझे बहका देता है और मैं छू लेता हूँ तुम्हारे…