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  • कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?

    कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?

    तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे ये चुराये हुये थे तुम्हारे पहले प्रेमी और मेरी पहली प्रेमिका से शायद उन दोनों को चूमना नहीं आता था चुराये हुये चुंबनों का स्वाद बहुत तीखा होता है इनमें मिली होती है…