Tag: Bhavesh Dilshad
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बहुत मुश्किल है अब कुछ भी यक़ीनी तौर पर कहना
फ़लक से तोड़कर क़िस्सा ज़मीनी तौर पर कहनाबहुत मुश्किल है अब कुछ भी यक़ीनी तौर पर कहना. किसे चाहें किसे मानें किसे छू लें किसे जानेंये बातें दिल की बातें हैं न दीनी तौर पर कहना. उसे फाज़िल कहो ऐसे हमें जाहिल सुनाई देक़सीदे में ये फ़न है नुक़्ताचीनी तौर पर कहना. मुहब्बत की सलाहीयत…
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मिलती मुद्दत में है और पल में हँसी जाती है
आप की याद भी बस आप के ही जैसी है, आ गई यूँही अभी यूँही अभी जाती है।
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कभी तो सामने आ बे-लिबास हो कर भी
कभी तो सामने आ बे-लिबास हो कर भी, अभी तो दूर बहुत है तू पास हो कर भी. तेरे गले लगूँ कब तक यूँ एहतियातन मैं, लिपट जा मुझ से कभी बद-हवास हो कर भी. तू एक प्यास है दरिया के भेस में जाना, मगर मैं एक समुंदर हूँ प्यास हो कर भी. तमाम अहल-ए-नज़र…
