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  • बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं
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    बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं

    “हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो हवा की बात बहुत दूर जाने वाली है” —हसन अख्तर जलील आज बाजार किसी भी हालात को नहीं छोड़ता, वो चाहे बारिश हो या बाढ़, आग हो या पानी बाजार अपनी जगह बना ही लेता है। दिल्ली आज दिलवालों की नहीं धुआं वालो की हो गई…