coronavirus

टीवी न्यूज ने कोरोना खत्म कर दिया है, जनता अपनी जान बचाए

मार्च का महीना था। कोरोना के डर से लोग कांप गए थे। पहले स्कूल-कॉलेज बंद हुए। दफ्तर बंद होने लगे। आखिर में रेल और हवाई सेवा रोक दी गई। अब आलम यह है कि सबकुछ खुल गया है। ठहरिए! कोरोना खत्म नहीं हुआ है। बस टीवी मीडिया ने इसका हाइप बनाना बंद कर दिया है। टीवी मीडिया की नई टीआरपी डार्लिंग अब चीन और लद्दाख विवाद है। नहीं, मैं खारिज नहीं कर रहा। लद्दाख बेहद अहम है। लेकिन कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य इंतजाम भी।

गिरते, मरते मजदूर बनाए गए कोरोना के विलेन

कोरोना काल शुरू होते ही टीवी मीडिया ने आम लोगों को विलन की तरह पेश कर दिया। मजदूरों और गरीबों पर पुलिस के डंडे बरसने लगे। खौफ और मजबूरी में लोग इधर-उधर भागे। एसी में बैठा सुविधाभोगी वर्ग उन्हें लापरवाह बताने लगा। जैसे-तैसे लाखों मजदूर घर पहुंचे। कोई सड़क पर मर गया, कोई ट्रेन के नीचे आ गया तो किसी का अभी तक पता नहीं है।

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मजे में है तबलीगी जमात का मुखिया मौलाना साद

इस बीच कुछ दिन तक तबलीगी जमात भी अच्छा निशाना बना। अब कोई चर्चा नहीं है। कम पैसे वाले गरीब जमातियों के खिलाफ केस हुआ। कुछ तो अभी भी मुकदमा झेल रहे हैं। दूसरी तरफ तबलीगी जमात का मुखिया मौलाना साद मजे में है। पुलिस उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती। ठीक विजय माल्या, ललित मोदी और जाकिर नाईक की तरह।

कोरोना से ठोकर मिली, हम चल बैठे अपने गांव

आप खुद को संभालिए, अब सरकार पैसा कमा रही है

अनलॉक-1 नाम का झुनझुना सरकार की नाकामी छिपाने का शानदार तरीका है। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है बल्कि और तेजी से बढ़ रहा है। दिन-ब-दिन नए मरीज और मरने वाले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की गुंडागर्दी सामने आ रही है। सोशल डिस्टेंसिंग अब शून्य होने के करीब है। इसलिए आपसे हाथ जोड़कर गुजारिश है कि अब कोरोना को और भी गंभीरता से लीजिए। बेहद जरूरी होने पर ही बाहर निकलिए। निकलने पर मास्क, गमछा या रूमाल का इस्तेमाल करिए।

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