Author: अनुराग अनुभव
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शकील बदायुनी: प्यार लिखने वाला शायर, जिसने कितनों को स्टार बना दिया
इंसाफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चलके ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्ही हो कल के या नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं बोलो मेरे संग, जय हिंद, जय हिंद , जय हिंद…. हम में से बहुत से लोग भले ही गीतकार और शायर शकील बदायुनी को न जानते हों, मगर अपने इन…
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फ़िल्म रिव्यू: कड़वी हवा, जिसकी कड़वाहट को समय रहते महसूस किया जाना चाहिए
‘कड़वी हवा’, पर्दे पर बंजर का एक ऐसा मंज़र है, जिसके सूखे को आप अपनी आंखों से तर कर देना चाहते हैं. फ़िल्म में संजय मिश्रा ‘हेदू’ नाम के एक अंधे बूढ़े के किरदार में हैं. अगर आपका ताल्लुक गांव से है और आपने ग़रीबी को देखा और महसूस किया है, तो आपको ‘कड़वी हवा’…
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मैं पूजा नहीं कर रही थी, एक बच्चे को प्यार कर रही थी- इस्मत चुग़ताई
ज़ंजीर कोई भी हो, अगर टूटेगी तो आवाज़ होगी. साहित्य और अदब में भी जब कभी कोई ज़ंजीर टूटती है, आवाज़ होती है. आवाज़ धीरे-धीरे शोर बन जाती है. शोर लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचता है. ऐसा ही एक शोर उठा था पचास के दशक में, जब इस्मत चुग़ताई ने ‘लिहाफ़’ लिखी थी. ‘लिहाफ़’,…
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मासूमों के कत्लों पर आपके मन में सवाल नहीं उठता?
बीते हफ़्ते की दो घटनाएँ, बक्सर के डीएम मुकेश पांडे की आत्महत्या और गोरखपुर में 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत. इन घटनाओं ने हमारे सामने कुछ ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब हमें समय रहते ढूँढ लेना चाहिए. इन सवालों के जवाब आधार कार्ड से भी ज़्यादा ज़रूरी हैं. अगली बार हमारी तथाकथित…
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मजबूरी में इन्हें घर कहना पड़ता है, मगर हैं ये ‘इंसानी पिंजरे’ ही
इंसानों की तेज़ी से बढ़ती आबादी का असर दुनिया के तमाम हिस्सों में दिखने लगा है. आए दिन जनसंख्या विस्फ़ोट के ख़तरों पर तमाम चर्चाएं होती रहती हैं. क़ुदरत के सीमित संसाधनों से लेकर इंसानों के अस्तित्व तक पर ख़तरे बताए जाते हैं. दुनिया के तमाम शहरों में अन्न, जल और ज़मीन की कमी से…