Category: नेशनल

  • तो क्या केजरीवाल ने इस बार रही-सही उम्मीद भी तोड़ दी?

    तो क्या केजरीवाल ने इस बार रही-सही उम्मीद भी तोड़ दी?

    मैं खुद आम आदमी पार्टी को उसके जन्म से जानता हूं, समझता हूं और काफी हद तक सहानुभूति रखता ‘था’। जी हां, रखता था। यह कहना है कई सारे ‘आप’ वालंटियर्स का। बुधवार को दिल्ली की 3 राज्यसभा की सीटों के लिए आम आदमी पार्टी यानी अरविंद केजरीवाल ने संजय सिंह (आप प्रवक्ता), सुशील गुप्ता…

  • तमिल राजनीति में शुरू होगा ‘थलाइवा’ का ‘सियासी शो’

    तमिल राजनीति में शुरू होगा ‘थलाइवा’ का ‘सियासी शो’

    सुपरस्टार रजनीकांत ने अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा कर दी है. जयललिता के रहते एकदम शांत और एकछत्र राज के तहत चल रहा तमिलनाडु जयललिता की मौत के बाद से एकदम अशांत हो चला था. पहले शशिकला का खुद को उनकी असली उत्तराधिकारी बताकर पार्टी और सरकार पर कब्जा और फिर नाटकीय रूप…

  • क्या इस हार ने कहीं और जीत के संकेत दिए हैं?

    क्या इस हार ने कहीं और जीत के संकेत दिए हैं?

    गुजरात-हिमाचल विधानसभा के नतीजे सामने आ चुके हैं और दोनों ही जगह जीत भारतीय जनता पार्टी की हुई है, इस जीत पर उन्हें बधाई। आज कांग्रेस के लिए दो मौके ऐसे भी आए, जिससे उन्हें शायद जरूर ही खुशी मिली होगी। पहला वो सुबह का एक घंटा जिसमे कांग्रेस ने बढ़त बनाने के साथ-साथ भारतीय…

  • इंटरनेट डकैती: रकम देने के बाद भी पिंड ना छोड़ने वाला भूत

    इंटरनेट डकैती: रकम देने के बाद भी पिंड ना छोड़ने वाला भूत

    पुराने जमाने में डकैती या चोरी कैसे होती थी? घोड़े पर विराजमान होकर अपराध जगत के देवता लोग आते थे या कोई निपुण राजगीर टाइप मानस दीवार की सेंध काट देता था और माल लेकर रफूचक्कर हो जाता था। अब जमाना इंटरनेट वाला हो गया है, घर बैठे आपके कम्प्यूटर में कब सेंध लग जाये,…

  • ‘आखिर हम जा कहां रहे हैं?’ कब तक यह सवाल रटा जाएगा?

    ‘आखिर हम जा कहां रहे हैं?’ कब तक यह सवाल रटा जाएगा?

    दंगल गर्ल के नाम से मशहूर 17 वर्षीय बाल अभिनेत्री ज़ायरा वसीम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके यह बताया कि दिल्ली-मुम्बई विमान में उनके साथ यात्रा के दौरान एक अधेड़ व्यक्ति ने छेड़छाड़ की। ज़ायरा ने उस वीडियो में रोते हुए कहा कि, मैं दिल्ली से मुम्बई जाने वाले एयर विस्तारा के विमान…

  • 6 दिसंबर 1992: उन्माद को नया रूप देने वाली एक तारीख

    6 दिसंबर 1992: उन्माद को नया रूप देने वाली एक तारीख

    यहां मेरी बात पढ़कर अगर आप भी मुझे मुगल प्रेमी, हिंदू विरोधी, फर्जी सेकुलड़ या देशद्रोही जैसी उपाधियां देने दौड़े आते हैं तो सच कहता हूं कि आप के दिमाग में सिर्फ भूसा भरा है। हल्ला करते हुए नहीं मन में शांति से ‘जय श्री राम’ बोलिए मन को शांति मिलेगी और आंखों पर से…

  • ‘मेरे पास मां है’- सिनेमा जब तक रहेगा, ये शब्द गूंजते रहेंगे

    ‘मेरे पास मां है’- सिनेमा जब तक रहेगा, ये शब्द गूंजते रहेंगे

    साल 1951, फिल्म थी आवारा, राज कपूर के बचपन का रोल निभाते हुए एक छोटा सा बच्चा स्कूल मास्टर से कहता है, ‘मास्टर साहब ये ब्रश है और ये पॉलिश है, मैं बहुत अच्छा बूट पॉलिश करता हूं’ उसी फिल्म में वो एक रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खाता है और अंत में रोटी…

  • जन्मदिन विशेष: भारत के पहले राष्ट्रपति जिन्हें नेहरु ने कभी राष्ट्रपति नहीं समझा

    जन्मदिन विशेष: भारत के पहले राष्ट्रपति जिन्हें नेहरु ने कभी राष्ट्रपति नहीं समझा

    भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का वह दौर जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत का दूसरा नाम महात्मा गांधी था, उस दौर में अपने-अपने क्षेत्र के बहुत से प्रतिष्ठित लोगों ने महात्मा गांधी के नाम पर अपने नौकरी पेशे को त्यागकर आन्दोलन की मुख्य धारा में खुद को झोंक दिया था. डॉ राजेंद्र प्रसाद उसी में से एक…

  • यूपी: चुनाव खत्म होते ही लगा 15 पर्सेंट का करंट

    यूपी: चुनाव खत्म होते ही लगा 15 पर्सेंट का करंट

    यूपी के निकाय चुनावों में काउंटिग से पहले ही बिजली के बढ़े दामों ने आम जनता को ‘छुआ’ दिया है। एकदम भन्न से घोषणा की गई है कि शहरी उपभोक्ताओं के लिए बिजली के दामों में 12 से 15 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी की जा रही है। जाहिर है, अगर यही कदम चुनाव से पहले…

  • जस्टिस लोया पर क्या कहती है कोर्ट की चुप्पी?

    जस्टिस लोया पर क्या कहती है कोर्ट की चुप्पी?

    लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। संविधान ने इन्हें इस तरह से गढ़ा है कि वे एक दूसरे की आलोचना कर सकते हैं और आलोचना करते हुए भी एक दूसरे के पूरक हैं। सभी के सवालों का महत्व है लेकिन जब सवाल न्यायपालिका उठाती है तो उसका महत्व कुछ ज्यादा ही बढ़…