Tag: भाजपा
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क्या सरकारी तंत्र के दम पर गुंडई ही सत्ता का चरित्र है?
पंचायत चुनाव में सत्ताधारी दल का गुंडई करना ही न्यू नॉर्मल है. वही पार्टी जो इसका विरोध करती है, सत्ता में आने के बाद जमकर गुंडई करती है.
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क्या जाति से आगे नहीं बढ़ पाएगी उत्तर प्रदेश की राजनीति?
राजनीति, चुनाव और जाति. इन तीनों का काफी गहरा संबंध है. खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में. बाकी राज्यों में भी जाति काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बिना जाति के एक पत्ता हिलना भी असंभव सा लगता है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं. लगभग आठ महीने…
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दिल्ली के बाद सुधरेगी भाजपा? या गुजरेगी भाजपा?
दिल्ली विधानसभा चुनाव को भाजपा (BJP) और अमित शाह ने सम्मान की लड़ाई बना दिया। इसके बावजूद वह कुछ खास नहीं कर सकी। जहां अरविंद केजरीवाल ने इसे स्कूल, अस्पताल और बिजली-पानी का चुनाव बताया। वहीं, बीजेपी लगातार शाहीन बाग, राम मंदिर और देशप्रेम-देशद्रोह जैसे मुद्दों पर लड़ती रही। आखिरी हफ्ते में तो बीजेपी की…
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राज्यपाल की कृपा कितने दिनों तक शाह को मात मिलने से रोक सकती है?
कर्नाटक इस बार आशंकाओं की बड़ेर पर खड़ा हो तमाशा देख रहा है कि क्या हो रहा है प्रदेश में. तीन पार्टियां, नाटक तेरह. कौन है गठबंधन की फिराक में तो किसे मिलेगा ठेंगा. सब कुछ अनिश्चित है. अब सरकार बनाने का सारा दारोमदार राज्यपाल वजूभाई वाला के जिम्मे है. अगर भाजपा की तरफदारी करें…
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फेसबुक को बाबा पसंद हैं
फेसबुक ने भारत के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री का खिताब योगी आदित्यनाथ को दिया है.
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हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं
हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं. चरस, भांग, गांजा और अफीम भारत में प्रतिबंधित है. मतलब आप वैधानिक रूप से फूंक नहीं सकते. कहीं पब्लिक प्लेस पर. लेकिन इस बात से कहां आप अनजान हैं कि देश में कुछ भी आप कर सकते हैं. कुछ भी का मतलब कुछ भी. दंगा करा सकते हैं, आग लगा…
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आखिर क्यों कंपकपा रही है भाजपा अध्यक्ष की जुबान?
बचपन में एक बार सुना था कि 24 घंटे में एक बार हर आदमी की जीभ पर सरस्वती बैठती हैं. उस वक्त वह सही कह रहा होता है. जैसे येदियुरप्पा को सबसे भ्रष्ट अमित शाह ने ही करार दिया. कहना तो वह सिद्धारमैया को चाहते थे लेकिन अपने ही सिपाही का नाम उनके मुह से…
