Posted in कविताई सब राहों के अन्वेषी बचे-खुचे जंगलों के साथ ही कट गये Estimated read time 1 min read Posted on June 27, 2020November 16, 2022 by लोकल डिब्बा टीम अब नहीं हैं प्रणययार्थी, न उनकी गणिकाऐं, वो गदिराए बदन भी नहीं हैं जिनपर लिख सको कामसूत्र जैसा ग्रंथ तुम…