Tag: प्रवासी मजदूर
-

हम फिर वापस आएंगे!
फिर से हम जिन्दा लाशें,अपने मरे हुए सपनों से, नाउम्मीदी ओर जिल्लत की जिंदगी सेफिर से हम आपके रुके हुए शहर को चलना सिखाएंगे,फिर से आपकी जिंदगी खुशनुमां बनाएंगे.
-

शहरों से ठोकर मिला, हम चल बैठे गांव
माना अपने गांव में, रहता बहुत कलेस। कुल पीड़ा स्वीकार है, ना जाइब परदेस।