Posted in कविताई शहरों से ठोकर मिला, हम चल बैठे गांव Estimated read time 1 min read Posted on May 11, 2020 by लोकल डिब्बा टीम माना अपने गांव में, रहता बहुत कलेस। कुल पीड़ा स्वीकार है, ना जाइब परदेस।