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भारतेंदु हरिश्चंद्रः आधुनिक हिंदी के पितामह
परिवर्तन गुजरते समय के अगले पदचिह्न के पर्याय भी होते हैं और एक लंबी यात्रा का एक पड़ाव भी। पड़ाव वह जहां से यात्रा नए कलेवर में, नई ऊर्जा के साथ एक नया स्वरूप लेकर आगे बढ़ती है। इस परिवर्तन को तब केवल परिवर्तन नहीं कहा जाता। तब इसे युगांतर, क्रांति या नए मार्ग का…