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क्या सरकारी तंत्र के दम पर गुंडई ही सत्ता का चरित्र है?
पंचायत चुनाव में सत्ताधारी दल का गुंडई करना ही न्यू नॉर्मल है. वही पार्टी जो इसका विरोध करती है, सत्ता में आने के बाद जमकर गुंडई करती है.
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क्या जाति से आगे नहीं बढ़ पाएगी उत्तर प्रदेश की राजनीति?
राजनीति, चुनाव और जाति. इन तीनों का काफी गहरा संबंध है. खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में. बाकी राज्यों में भी जाति काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बिना जाति के एक पत्ता हिलना भी असंभव सा लगता है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं. लगभग आठ महीने…
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मायावती की खोई जमीन पर पार्टी बना लेंगे चंद्रशेखर आजाद?
मायावती बड़ी नेता हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ी नेता थीं। इतनी बड़ी नेता थीं कि अपने बलबूते कई चुनाव जीते। लेकिन अब उनका चार्म जाता रहा। बदलता समय कहें या फिर राजनीतिक के स्टाइल में बदलाव। मायावती धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो रही हैं। उनके वोटर्स (ज्यादातर दलित वर्ग के वोटर्स) को 2017 में मोदी जी…
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क्या बीएसपी में मायावती की जगह ले पाएंगे आकाश आनंद?
क्या बीएसपी में मायावती की जगह ले पाएंगे आकाश आनंद? दिखने में स्मार्ट, जींस और शर्ट पहनने वाला और विदेश से पढ़ा हुआ लड़का। भारत में इतने गुण एक नेता के पॉप्युलर होने के लिए काफी हैं लेकिन नए-नवेले आकाश आनंद के पास इसके अलावा सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है कि वह बीएसपी चीफ मायावती…
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तीन राज्य जीतकर जोश में आई कांग्रेस UP में अकेले उतरेगी?
यूपी में महागठबंधन की उम्मीद लगाए बैठी कांग्रेस को सोमवार को एसपी और बीएसपी ने एक बड़ा और सांकेतिक झटका दिया। हो सकता है कि यह दबाव बनाने की रणनीति ही हो लेकिन तीन राज्यों में हुए शपथ ग्रहण में अखिलेश यादव और मायावती का न जाना एक बड़ा संदेश है। संदेश साफ है कि…
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चंद्रशेखर ‘रावण’ को छोड़ना बीजेपी की चालाकी है या मूर्खता?
चंद्रशेखर रावण को तो आप जानते ही होंगे? वही भीम आर्मी वाले। वही भीम आर्मी जिसने दलितों को दम भरना सिखाना शुरू किया तो इसे बनाने वाले चंद्रशेखर को बीजेपी की सरकार ने रासुका कानून के तहत जेल में ठूंस दिया। अब बीजेपी को 2019 की कुर्सी हासिल करनी है तो दलितों पर विशेष प्रेम…
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कर्नाटक के बाद कैराना: तो आ गए बीजेपी के बुरे दिन?
परिणामों को लेकर यह बात नहीं कही जा रही है लेकिन कैराना में चुनावी समीकरणों देखते हुए राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बीजेपी की राह काफी मुश्किल है। दलित-मुस्लिमों की बहुलता के साथ-साथ विपक्ष की एकता बीजेपी पर भारी पड़ती दिख रही है। पिछले कुछ महीनों से जाट और दलित समुदाय के लोग बीजेपी…
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आंबेडकर का रंग चाहे जितना बदलो ‘असली वाला’ 2019 में दिखेगा
2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत पतली होने के बाद नरेंद्र मोदी ने खुद को विकास-पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट किया। ऊपरी तौर पर वह खुद को विकास पुरुष बताते लेकिन हिंदू वोटर्स कुछ अलग ही लक्ष्य हासिल होता देख खुश हो रहे थे। इन हिंदुओं में हर जाति के लोग शामिल थे।…