कर्नाटक के बाद कैराना: तो आ गए बीजेपी के बुरे दिन?

परिणामों को लेकर यह बात नहीं कही जा रही है लेकिन कैराना में चुनावी समीकरणों देखते हुए राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बीजेपी की राह काफी मुश्किल है। दलित-मुस्लिमों की बहुलता के साथ-साथ विपक्ष की एकता बीजेपी पर भारी पड़ती दिख रही है। पिछले कुछ महीनों से जाट और दलित समुदाय के लोग बीजेपी से दूर ही हुए हैं, ऐसे में बीजेपी वोट कहां से लाएगी और अपनी सीट कैसे बचाएगी यह देखने वाली बात होगी।

विपक्ष को मिल गया 2019 का फॉर्म्युला?
गोरखपुर-फूलपुर में जब दो धुर-दुश्मनों ने हाथ मिलाया था, तब भी किसी को उम्मीद नहीं थी कि ‘साइकल पर सवार हाथी’ कमल को कुचल जाएगा। परिणामों ने बीजेपी के हाथ से ऐसी दो सीटें छीन लीं, जोकि दो बड़े नेताओं योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफ से खाली हुई थीं। इस गठबंधन ने परिणाम अच्छे दिए तो आगे की भी प्लानिंग होने लगी। राज्यसभा में भी सपा-बसपा ने जोर लगाया लेकिन अंकगणित बीजेपी के पक्ष में फैसला दे दिया। हालांकि, गठबंधन जारी रहा और 2019 की रणनीति तैयार होने लगी।

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इसी बीच कर्नाटक के चुनाव में भी लगभग सभी दल ऐंटी बीजेपी होते दिखे और कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की सरकार बनते वक्त मौजूद नेताओं की उपस्थिति ने बताया कि 2019 में विपक्ष का फॉर्म्युला कुछ ऐसा हो सकता है। तमाम नेता दावा कर रहे हैं कि क्षेत्रीय पार्टियां मिलकर ही मोदी को 2019 में हरा सकती हैं। यह सही भी है कि अगर उत्तर प्रदेश में विपक्ष का फॉर्म्युला चल गया और बीजेपी 40 सीटों से कम पर सिमटी तब उसके लिए 272 सीटों का आंकड़ा मुश्किल हो सकता है। इस बात की पुष्टि एबीपी न्यूज के सर्वे ने भी की है कि यूपी में बीजेपी की सीटें लगभग आधी हो सकती हैं।

कैराना फैक्टर
कैराना में सपा, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल ने संयुक्त रूप से तबस्सुम हसन को उतारा है। मायावती के साथ दलित, अखिलेश के साथ पिछड़ा वर्ग, अजित सिंह के साथ जाट और तबस्सुम के साथ मुस्लिमों का यह गठजोड़ अगर कामयाब रहा तो विपक्ष एक बार फिर से हावी होगा और 2019 के लिए इस फॉर्म्युले को और मजबूती मिल जाएगी।

कर्नाटक में मुंह की खाने के बाद बीजेपी और उसके सेनापति अमित शाह की बौखलाहट साफ दिख रही है। ऐसे में कैराना और नूरपूर में हारना यह संकेत देगा कि अब वह चुकने लगे हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश भी चुनौती ही हैं, अगर कहीं यहां भी हालत खराब हुई तो सचमुच बीजेपी के बुरे दिन आएंगे और उसका 2019 में मोदी को फिर से पीएम बनाने का सपना चकनाचूर हो जाएगा।

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