Tag: kavitayi
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जन्मदिनः ‘मैं जो हूं जॉन एलिया हूं जनाब, इसका बेहद लिहाज कीजिएगा’ – जॉन एलिया
हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाजे बयां और जिन लोगों ने जॉन एलिया को मंचों पर शेर पढ़ते सुना है वो गालिब के इस शेर का प्रायोगिक प्रस्तुतिकरण महसूस करते होंगे। इस शेर में गालिब की जगह जॉन लिख देने के बाद सिर्फ शेर की बहर…
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पुण्यतिथिः शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है – मैथिलीशरण गुप्त
यह रिवर्स टैलेंट का दौर है,जब संघर्षों की आवश्यक प्रक्रियाएं रोचक कहानियों के आवरण में सहानुभूतिक शब्दों के टैगलाइन के साथ बेची जा रही हैं, निहित स्वार्थों के लिए। ऐसे में साहित्य के घोषित उद्देश्यों के अधीन गुप्त जी की इस कविता के माध्यम से अपने देश के किसानों और किसानी को महसूस कीजिए। गुप्तजी…