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पर्सोना: इंसानी दिमाग की परतें खोल देने वाली शानदार फ़िल्म
शब्द और भाषा कितने आवश्यक हैं? आख़िर भाषा से ही तो समझे न जाने का भी दुःख पनपता है. यह दुःख किसी व्यक्ति तो इतना मरोड़े कि वह भाषा ही छोड़ दे? इंगमर बर्गमैन अपनी फ़िल्म पर्सोना में आततायी भाषा की अनुपयोगिता के कंधे पर चढ़कर कुछ प्रश्न खड़े करते हैं. मसलन वह भाषा के…
