वंदे मातरम की रचना करते समय बंकिम चंद्र चटोपध्याय ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनकी इस रचना को देशभक्ति के सर्टिफिकेट के तौर पर उपयोग किया जाएगा