Posted in कविताई नज़्म ‘औरत’: माथे पर लिखी मेरी रुसवाई नहीं जाती Estimated read time 1 min read Posted on March 8, 2019November 24, 2022 by लोकल डिब्बा टीम माथे पे लिखी मेरी रुसवाई नहीं जाती… जब भूख लगी तब मैं, या प्यास लगी जब तब मैं हाथ लगी…