फिर से हम जिन्दा लाशें,अपने मरे हुए सपनों से, नाउम्मीदी ओर जिल्लत की जिंदगी सेफिर से हम आपके रुके हुए शहर को चलना सिखाएंगे,फिर से आपकी जिंदगी खुशनुमां बनाएंगे.
Month: May 2020
शहरों से ठोकर मिला, हम चल बैठे गांव
माना अपने गांव में, रहता बहुत कलेस। कुल पीड़ा स्वीकार है, ना जाइब परदेस।
लॉकडाउन में शराब मिलने के बाद पढ़ें बेवड़ों का इंटरव्यू
देश एक मुश्किल दौर से गुजर रहा हैं। हम सब नौकरी से लेकर जान तक गवां रहे हैंं लेकिन एक वर्ग ऐसा भी हैं, जो […]