बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या: बंगाल में ममता जिम्मेदार तो यूपी में कौन?

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो कार्यकर्ताओं की हत्या हो गई। हालांकि, इनमें से एक मामले को हत्या नहीं आत्महत्या बताया जा रहा है। बलरामपुर के पढ़िह गांव के पास जंगल में 18 वर्षीय त्रिलोचन महतो का शव एक पेड़ से लटका हुआ मिला। शव की पीठ पर एक पोस्टर चिपका था। इस पोस्टर में लिखा था, ‘बीजेपी के लिए काम करोगे तो यही हश्र होगा।’ एक ऐसा संदेश जो सीधे तौर पर राजनीति से प्रेरित और बनाम राजनीति के लिए था। ऐसे में सीधा सवालों के घेरे में बीजेपी की ओर से पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को लिया गया।

 

केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी, प्रकाश जावड़ेकर समेत बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए दिया। सवाल जायज भी है क्योंकि राज्य की ध्वस्त कानून व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार से सवाल करना गलत नहीं है। आखिर राज्य की जिम्मेदारी देकर जनता सत्ता सौंपती है। अपेक्षा की जाती है कि राज्य सुचारु रूप से विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा लेकिन व्यवस्थाएं जब भी चरमराने लगती हैं तो मुखिया की ओर ही सवालों की फेहरिस्त बढ़ाई जाती है।

 

पश्चिम बंगाल में त्रिलोचन महतो की हत्या के बाद एक और हत्या हुई। पुरुलिया जिले के ही बलरामपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दाभा गांव में दुलाल कुमार (32) नाम के बीजेपी कार्यकर्ता का शव गांव में खंभे से लटका मिला। बीजेपी ने फिर से घटना के पीछे तृणमूल कांग्रेस का हाथ बताया। तीन दिन में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की भी मांग उठी। जनता के सामने बीजेपी ने यह सवाल रखा, ‘देखिए कानून व्यवस्था का क्या आलम है।’ यही आलम जब बीजेपी शासित प्रदेश में हो तो क्या मुख्यमंत्री से सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है?

यूपी में कौन है जिम्मेदार?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। योगी आदित्यनाथ तकरीबन हर मंच से पुख्ता कानून व्यवस्था का दावा करते हैं लेकिन पिछले शनिवार और रविवार को बलिया जिले में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। रसड़ा कोतवाली क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ता नथुनी सिंह का नाम पूछकर बदमाशों ने शनिवार को हमला कर दिया। इस हमले में नथुनी सिंह तो बाल-बाल बच गए लेकिन उनके साथी को दो गोलियां लगी, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। बलिया जिले के सहतवार थाना क्षेत्र अंतर्गत महाराजपुर चट्टी के पास बदमाशों ने पुरासगांव निवासी मनोज सिंह (46) की हत्या कर दी।

सवाल तो सबसे पूछे जाएंगे

बंगाल में तीन दिनों में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या। यूपी के बलिया में दो दिनों में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला, एक की मौत। सवाल सिर्फ ममता से क्यों? हां, यह कतई नहीं कहा जा रहा कि उनसे सवाल क्यों किया गया लेकिन यह बात भी जेहन में है कि योगी आदित्यनाथ से बीजेपी के धड़े ने सवाल क्यों नहीं किया? यूपी में तो योगी की सरकार है। बीजेपी अपने मुताबिक, हर व्यवस्था की बिसात बिछाकर उस पर अमल करा सकती है। इसके बावजूद बीजेपी कानून व्यवस्था के मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। जनता के जेहन में कई अन्य सवाल भी हैं। ये सवाल सिर्फ बीजेपी, कांग्रेस या समाजवादी पार्टी से नहीं बल्कि सत्ता तक पहुंचे सभी राजनीतिक दलों से हैं।

आम कार्यकर्ता मरता रहेगा?

क्यों राजनीतिक पार्टियां जब तक विपक्ष में होती हैं तभी तक सवाल उठाती हैं? क्यों सत्ता हासिल होने के बाद यह सवाल अखरने लगते हैं? क्यों इन सवालों को राजनीति ने अमरत्व की श्रेणी में रख दिया है? सत्ता बदलने के साथ ही सवालों में तब्दीली क्यों नहीं आती? जनता के मुद्दे सिर्फ विपक्ष तक क्यों सिमट कर रह गए हैं? सत्तासीन दल काम करने के बजाए खोखले दावों पर यकीन क्यों रखती हैं? क्यों हर बार नाकामी पर पुरानी सरकारों के साथ तुलना की जाने लगती है? इन सवालों का जवाब देने के नाम पर शायद इस बार भी निशब्द होना ही पसंद करेंगे।

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