पॉलिटिकल लव: 2019 आया करीब, बदले प्रधानसेवक के नसीब

तुम नागपुर जा रहे हो?
हां जा रहा हूँ वहाँ पर कुछ काम से।
तो बताओगे क्यों जा रहे हो, कब से पूछ रही हूँ।
जो बोलना होगा नागपुर में ही बोलूंगा।
क्यों अभी तुम्हारे मुंह में दही जम गई है क्या ?
नहीं ऐसा नहीं पर मैं वहीं बोलूंगा।
पता नहीं नागपुरवालों ने क्या जादू कर दिया है तुमपर!

तुम बहुत बदल गए हो।
क्या हुआ जी वैसा ही तो हूँ।
बस बस मेरे घर पर तुमसे टोपी नहीं ली जाती थी।
हां तो मैं नहीं मानता उनको।
और जो अब तुम चद्दर ओढ़ रहे हो वो।
अरे बेबी समझा करो 2019 करीब है।

कितने पैसे बचा लेते हो?
एक पैसा ही बच पता है।
पहले तो तुम बोल रहे थे कि 60 पैसे बचते हैं।
अरे बाबा वो टाइपिंग एरर था।

यार बहुत दिन हो गए छुट्टी लिए।
कबसे नहीं लिए हो छुट्टी जी?
2001 से नहीं ले पाया।
कोई बात नहीं मैं तुम्हारी लंबी छुट्टी का प्लान कर रही हूँ।
कबसे मिलेगी छुट्टी यह बताओ बस।
2019 से परमानेंट छुट्टी मिल जाएगी चिंता न करो।

अच्छा जानू तुम्हें कौन सा रंग पसंद है ?
तुम्हें तो पता है आई लव भगवा।
अच्छा तो सब चीज़ तुम्हें भगवा ही पसंद है !
हां, मैंने तो अपने वाशरूम का कलर भी भगवा करवा लिया।
वाह मेरी जान यूपी वाले बाबा के बाद तुम ही हो भगवा प्रेमी।

ये तुम्हारे में शंख क्यों बज रहा है?
अरे वो बाबा वाली सिम डाले है फोन में।
देखते रहना कहीं फोन खुद अनुलोम-विलोम न करने लगे!
अरे चिंता मत करो हम उसको मन की बात सुनाते रहते हैं।
अच्छा फिर तो रिचार्ज की भी डिमॉन्ड नहीं करती होगी सिम।
क्या बात है एकदम सही पकड़ी हो।

तुम्हारे गांव वाले मामा लोन कब चुका रहे हैं?
अरे जब तुम्हारे डिमान्ड वाले अंकल दे देंगे।
अरे अंकल की तो हिसाब-किताब वाली फ़ाइल ही जल गई।
और मेरे मामा वाली फ़ाइल भी जल गई क्या उसी में?
नहीं तुम्हारे मामा का सारा हिसाब किताब ऑनलाइन रखा है मैंने।
तो अपने अंकल का नहीं रख पा रही थी तुम!

इस बार तो तुम हार गई।
हारना तो था ही मुझे क्योंकि सब लोग छुट्टी पर चले गए थे।
अच्छा जी कल को बोलोगी की सब विदेश चले गए।
अरे विदेश तो नसीब वाले फूफा ही जाते हैं।

यार अपना ख्याल रखा करो।
क्यों क्या हुआ है ऐसा ?
कुछ नहीं गर्मी ज्यादा हो रही है ना आजकल।
हां सही बोल रहे हो तभी तो ईवीएम को लू लगी थी।
हां तो अब अपना ख्याल रखो नीबू पानी पीती रहो।

यार मेरी साइकिल पंचर हो गई है।
तो हम क्या कर सकते हैं यार?
तुम्हें पंचर बनाना नहीं आता क्या?
अरे मैं सूरत से नहीं पढ़ा हूँ।
वहाँ से पढ़ते तो कक्षा 6 में ही पंचर बनाना सीख लेते।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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