पॉलिटिकल लव: सैंया गए तेल लेने आओ हम-तुम इश्क लड़ाएं

तुम कोई भी फैसला सुना देती हो।
सही फैसला ही सुनाती हूँ मैं।
तुम न वही फैसले सुनाया करो जिनका पालन हो सके।
अच्छा तो मैं तुम्हारी गुलाम बन जाऊं!
नहीं-नहीं तुम स्वंत्रत हो एकदम।
अच्छा लेकिन लग नहीं रहा है।

मैं तुम से बात नहीं करूंगी।
क्यों क्या हुआ मेरी जान?
तुम हर बात तो मंदिर-मस्जिद पर ले आते हो।
तो तुम भी तो पता नहीं क्या गरीबों की बात करने लगती हो।
अच्छा अब मैं सच भी न बोलूं क्या ?

तुम बहुत बनाने लगे हो अब ।
हम कुछ नहीं बन रहे है।
अब तुम चाहे ट्रम्प से गठबंधन कर लो बचोगे नहीं।
अरे जाओ तुम देख लेंगे 2019 में तुम्हें भी।
देख तो जरूर लोगे लेकिन सबक सीखने के बाद।

लोकल डिब्बा के YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें.

तुम कुछ काम क्यों नहीं कर लेते।
हां सोच रहा हूँ चंदा ही मांग लूं।
क्यों तुम कोई पार्टी बनाने जा रहे हो क्या ?
हां सोच रहा हूँ 2019 में लड़ जाऊँ मैं भी।

एक बात बोले हमें न रात में बड़ा डर लगता है।
अच्छा तो बताओ क्या किया जाए?
एक काम करो तुम न एक चौकीदार रख दो।
अरे तुम नहीं जानती की चौकीदार ही आज कल सबसे ज्यादा चोरी कर रहे है।
अच्छा फिर रहने दो, पता चले सब उलटा ही पड़ जाए।

मैं ना तुम से कुछ सवाल पूछना चाहती हूं।
पूछ लो सवाल लेकिन पत्रकार बन कर ही पूछना।
अच्छा इसका मतलब बस तीन ही सवाल कर सकती हूँ।
क्यों तुम कुछ सुरक्षा से जुड़े सवाल करने वाली हो क्या ?
क्यों तुम भी घोटाला कर दिये हो क्या?

तुम से एक बात बोलनी थी।
हां बोलो, क्या बात है ?
तुम न थोड़ी पतली हो जाओ।
जब से गुजरात से आये हो तब-से यही क्यों बोल रहे हो।
अरे हो जाओ न पतली, इसमें क्या जा रहा है तुम्हारा !
अच्छा नहीं हुई तो तलाक़ दे दोगे क्या !
नहीं-नहीं, तलाक देकर जेल थोड़ी जाना है।

कहाँ गायब थे तुम जी इतने दिन?
अरे कुछ नहीं तोता लेने गया था।
अच्छा देख कर लेना तोता।
अरे चिंता मत करो लुटियंस जोन वाले तोते नहीं है ये।

तुम रो क्यों रहे हो ?
याद आ रही है मुझे किसी की।
तो तुम सच में रो रहे हो।
हां अब मुझे क्या करना झूठ में रो कर।
मुझे लगा तुम भी 2019 में चुनाव लड़ने वाले हो तभी रो रहे हो।

तुम तो सही हो लेकिन
लेकिन क्या हुआ मेरी जान
तुम्हारी पार्टी सही नहीं है
अरे पार्टी गई तेल लेने तुम बस मुझे देखो

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

इस लेखक के और लेख

पुलिस वालों को ‘ठंडा’ रहने की ट्रेनिंग मिलनी बहुत जरूरी है

‘देश बचाने’ के नाम पर इकट्ठा होता मुद्दा विहीन विपक्ष क्या करेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

August 2026
S M T W T F S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031