हांग कांग आंदोलन: प्रदर्शन के तरीके सुनकर होश उड़ जाए

दुनियाभर में आंदोलन चल रहे हैं लेकिन चर्चा बस एक आंदोलन की हो रही है, वह है हांग कांग का आंदोलन। यह आंदोलन कई मायनों में खास है क्योंकि इसका कोई नेता नहीं है। सब अलग-अलग होकर भी एक हैं। इसमें जो तरीके अपनाए जा रहे हैं, वे नए से लेकर पुराने तक हैं। अभी जल्द में ही इस आंदोलन की एक फोटो वायरल हुई थी, जिसमें आंदोलनकारियों ने ऐम्बुलेंस के लिए जगह छोड़कर सबका दिल जीत लिया था। कई और बातें भी हैं, जो इस आंदोलन को खास बनाती हैं। पहले हम जानने की कोशिश करते हैं कि यह आंदोलन हो क्यों रहा है।

 

ambulance

क्या है हांग कांग आंदोलन की वजह

1984 में ब्रिटेन और हांगकांग के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें हांगकांग को चीन को लौटा दिया गया था। 1 जुलाई सन् 1997 से हांगकांग पर चीन का शासन चलने लगा। इसके लिए हांग कांग में एक देश-दो सरकार का सिद्धांत लागू किया गया। ऐसा भी मान सकते हैं कि हॉन्गकॉन्ग चीन का कश्मीर है। लेकिन जो इनके यहां पत्र पर हस्ताक्षर हुए थे, वो बस 50 साल के लिए थे। यानी 2047 में हॉन्गकॉन्ग पर एक ही सरकार (यानी चीन की सरकार) का सिद्धांत लागू होना शुरू हो जाता लेकिन सरकार इतना इंतज़ार कहा करती है। चीन सरकार ने नए-नए कानून बनाकर हांग कांग को अपने अंडर में लेने का काम शुरू कर दिया और इसी के विरोध में वहां के लोग आंदोलन पर उतर आए। उनका आंदोलन कोई आम आंदोलन नहीं था। उन्होंने इसमें तकनीक का भी इस्तेमाल किया और पुराने तरीकों को भी। आइए आंदोलन में इस्तेमाल हुए इन तरीकों को।

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1. यह बात सच में एक नंबर की है क्योंकि ऐसा आपको शायद ही देखने को मिला होगा। इस आंदोलन की सबसे बड़ी बात और सबसे खास बात यह है कि इसका कोई नेता नहीं है। सब अलग-अलग होकर भी एक हैं, ऐसे में सरकार के लिए इनको तोड़ना बहुत मुश्किल है। चलिए थोड़ा आसान करके समझते हैं। इंडिया में कई आंदोलन होते है लेकिन वे किसी न किसी एक पर फोकस होते हैं। उदाहरण के तौर पर अन्ना आंदोलन। बाबा साइड हुए तो आंदोलन भी हवा हो गया लेकिन इस आंदोलन में तो नेता ही नहीं है। तो अगर इस आंदोलन को खत्म करना है तो किसी नेता को नहीं मांगों को मानना पड़ेगा।

2. इस आंदोलन में एक चीज बिल्कुल नहीं है, वो है आपकी हर आंदोलन की जान सेल्फी। हांग कांग के आंदोलन में लोगों ने कोई सेल्फी नहीं ली और न कोई फोटो कहीं किसी जगह शेयर की है क्योंकि जैसे ही वो शेयर करते सरकार तुरंत उन्हें ट्रैक करके गिरफ्तार कर लेगी। ये बात उनको उनके पुराने यानी 2014 के आंदोलन से समझ में आई क्योंकि उस टाइम उन्होंने खूब फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी, जिसके बाद कई लोग गिरफ्तार हो गए थे तो उन्होंने इस आंदोलन में वो गलती दुबारा नहीं की। सेल्फी ना लेने से वो दो चीज़ों से बच गए- एक तो गिरफ्तारी और दूसरा दिखावे से क्योंकि उनका लक्ष्य फोटो पर लाइक पाना नहीं मांगों को मनवाना है।

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3. 2014 के हांग कांग आंदोलन में छाते का इस्तेमाल

ये बात थोड़ी अजीब है लेकिन इस आंदोलन में वो भी हुआ है। इसके दो फायदे थे एक तो आंदोलनकारियों की पहचान छुपी और दूसरी पुलिस रबर बुलट से भी बच गए। और सबसे बड़ी बात छाता तो हर घर में मिल जाता है तो इसलिए सबको इसमें शामिल होने के लिए कुछ खास नहीं करना पड़ा और आसानी से इससे जुड़ गए।

लेजर लाइट

4. इन आंदोलनकारियों ने पुलिस को लेज़र लाइट से ही हरा दिया। क्यों, यकीन नहीं हो रहा न! तो चलिए पूरी बात समझते हैं। यहां हम बात कर रहे हैं, उसी लेज़र लाइट की, जिससे हम अकसर दूसरों को तंग करते हैं। अब उसी लेज़र लाइट से हॉन्गकॉन्ग के लोग पुलिस को तंग कर रहे है। हांग कांग की पुलिस के पास एक Hd कैमरा होता है, जिसमें जो उनके सामने होता है उसकी पूरी डिटेल्स बता देता है कि वो कौन है और कहाँ से है। यह कैमरा यह भी बता देता है कि वह बिना बाल के कैसा दिखेगा और बाल के साथ। लोगों ने इस कैमरे को गुमराह करने के लिए लेज़र लाइट का इस्तेमाल किया क्योंकि लेज़र लाइट फोटो को बिगाड़ देती है जिस से फोटो साफ नहीं आ पाती और उनकी पहचान छुपा रहती है। अब सोचिये इतनी बड़ी तकनीक का जवाब उन्होंने एक लेज़र लाइट से ही दे दिया। है न गज़ब की बात। लेकिन वहाँ की पुलिस भी कम नहीं है, उसने दुकान से लेज़र लाइट लेने वाले लोगों को ही गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है।

5. खुद का ऐप बना लिया आंदोलन के लिए

इस बात को समझने के लिए थोड़ा अपने इंडिया में आते हैं। अभी हाल ही में सरकार ने कश्मीर में इंटरनेट बंद करके उसको पूरी दुनिया से काट दिया और यहां भी मोबाइल सर्विस बंद कर दी गई तो उन लोगों ने लोकल स्तर पर एक ऐप ही बना डाला, जिससे वे आपस में बात कर सकें। इसमें सरकार कुछ नहीं कर सकती थी तो हुआ न तकनीक का जवाब तकनीक से!

6. इस आंदोलन में लोग ही नहीं पुलिस भी कई नए तरीके इस्तेमाल कर रही है। हमारे यहां पुलिस गंदे पानी का वाटर कैनन लेकर आती है लेकिन यहां ये वाटर कैनन कोई आम वाटर कैनन की तरह नहीं है। इनके कैनन से एक इंक निकलती है, जो सीधा बॉडी पर जाकर चिपक जाती है। जिससे बाद में पुलिस आंदोलनकारियों की पहचान कर लेती है। अपने आप को पूरी तरह से ढककर आम लोग इससे भी बच जाते हैं।

hong kong protest

7. पुलिस भीड़ को हटाने के लिए वाटर कैनन के बाद आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करती है। वही यहां भी होते हैं लेकिन यहां के लोग उसको निष्क्रिय कर देते हैं। वो भी कोई बहुत बड़ी तकनीक से नहीं बस पानी से, जी हां सही सुना पानी से ये लोग रुलाने वाली गैस का जवाब देते हैं लेकिन इसके लिए वो पूरी ट्रेनिंग लिए होते हैं।

8. अब सवाल कि इतना बड़ा आंदोलन हो रहा है। लोगों की जरूरत कैसे पूरी हो रही है? जरूरत यानी खाना, पानी और जरूरी सामान कैसे दिए जा रहे हैं। इस आंदोलन में तो इसके लिए उन्होंने एक पुराने तरीके को इस्तेमाल किया है। उन्होंने एक लंबी लाइन बना रखी है, जो फट से जरूरत का सामान लोगों तक पहुंचा देती है।

ऐसे ही कई तरीकों को अपना रहे हैं हांग कांग के आंदोलनकारी अपने आंदोलन को सफल बनाने के लिए। कभी हवाई अड्डे पर बोर्ड लेकर लोगों को बता रहे हैं तो कभी कपड़ों के रंग बदलकर लोगों को कुछ अलग बताने पर लगे हुए हैं और हमें भी सीख दे रहे हैं कि किस तरह आंदोलन किया जाए। क्योंकि मीडिया में आंदोलन नहीं दिखाए जा रहे हैं न उनके यहां न हमारे यहां। उनके आंदोलन में कई दिक्कत भी आ रही है। जैसे कि पुलिस वाले खुद भी आंदोलनकारियों की भीड़ में घुस गए हैं, वह भी आंदोलनकारी बनके लेकिन आंदोलन करना इतना आसान नहीं होता कुछ तो दिक्कत जरूर आती है तो इसे वही दिक्कत समझें।

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