कविताईः ‘जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रीय चेतना से भरपूर उनकी रचनाएं आज भी साहित्य-प्रेमियों […]

क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?

लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब तक वह लोकतंत्र लगभग अधूरा रहेगा।और जब यह विरोध ख़त्म हो जाएगा तो वह लोकतंत्र तानाशाही में परिवर्तित होने लगेगी,लेकिन प्रश्न यह है कि विरोध का स्वरुप कैसा हो??

हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं

हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं. चरस, भांग, गांजा और अफीम भारत में प्रतिबंधित है. मतलब आप वैधानिक रूप से फूंक नहीं सकते. कहीं पब्लिक प्लेस […]

न प्रेस कार्ड है, न प्रिंटिंग प्रेस, न नौकरी, फिर भी अखबार निकालता है यह पत्रकार

मुज़फ्फर नगर में एक पत्रकार ऐसा भी है जिसके पास न अपनी छपाई मशीन है, न कोई स्टाफ और न सूचना क्रांति के प्रमुख साधन-संसाधन। […]