Category: फ़िल्म समीक्षा
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पर्सोना: इंसानी दिमाग की परतें खोल देने वाली शानदार फ़िल्म
शब्द और भाषा कितने आवश्यक हैं? आख़िर भाषा से ही तो समझे न जाने का भी दुःख पनपता है. यह दुःख किसी व्यक्ति तो इतना मरोड़े कि वह भाषा ही छोड़ दे? इंगमर बर्गमैन अपनी फ़िल्म पर्सोना में आततायी भाषा की अनुपयोगिता के कंधे पर चढ़कर कुछ प्रश्न खड़े करते हैं. मसलन वह भाषा के…
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सोनचिड़िया रिव्यू: चंबल की ऐसी कहानियां जिन्हें दिखाने के लिए कई पीढ़ियां गुज़र गईं
“बैरी बेईमान, बागी सावधान।” बहुत छोटी सी बात है मगर इसके मायने इतने गहरे हैं कि हम सब अपने अंदर सदियों तक झाँकते रह सकते हैं। अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी ‘सोनचिड़िया’ चंबल की घाटियों के बीच बुनी हुई कहानी है। अभिषेक इससे पहले ‘इश्किया’, ‘डेढ़ इश्किया’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।…
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संजू: नेताओं और ‘भाई’ को बचाने की एक सफल कोशिश
रणबीर कपूर हू-ब-हू संजय दत्त लगे हैं। वाक़ई बहुत मेहनत कराई है हिरानी ने उनसे। कई बार संजू बाबा दिखने की मेहनत इतनी हुई है कि चेहरा ही एक्सप्रेशन विहीन दिखाई देने लगता है रणबीर का। मनीषा कोईराला का रोल बहुत छोटा है लेकिन काफ़ी हद तक नरगिस को जस्टिफ़ाई करता है। परेश रावल की…
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फ़िल्म समीक्षा- एक स्वादिष्ट पकवान की तरह है सैफ की “शेफ़”
फ़िल्म समीक्षा- एक “शेफ” निर्माता- भूषण कुमार निर्देशक- राजा कृष्ण मेनन मुख्य कलाकार- सैफ अली खान, पद्मप्रिया, स्वर कांबले, मिलिंद सोमण। रेटिंग- 3.5/5 हर कोई अपने सपने को जीना चाहता है, कुछ लोग सपनों को पूरा करने में अपनों को खो देते हैं और कुछ लोग अपनों के लिये अपने सपनों को खो देते हैं,…
