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क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?
लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब तक वह लोकतंत्र लगभग अधूरा रहेगा।और जब यह विरोध ख़त्म हो जाएगा तो वह लोकतंत्र तानाशाही में परिवर्तित होने लगेगी,लेकिन प्रश्न यह है कि विरोध का स्वरुप कैसा हो??
झंडे की डोर टूटी तो 40 फीट ऊंचे पोल पर चढ़ गया यह लड़का
https://youtu.be/LDgdlz9gexs?t=1
क्या माउंट एवरेस्ट चढ़नेवालों को जिम्मेदारियों का एहसास है?
आए दिन आप अखबारों, वेबसाइट्स और कभी-कभी टीवी पर भी देखते होंगे कि फलां व्यक्ति माउंट एवरेस्ट पर चढ़ा। कुछ…
