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धरती के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर कितना मुश्किल है जीवन, समझिए

धरती अपने अक्ष पर साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है. धरती की बनावट, उसका आकार, उसका झुकना और घूमना. ये चार चीजें ऐसी हैं, जो धरती पर दिन-रात, सर्दी-गर्मी और इस तरह की कई अन्य चीजों को निर्धारित करती हैं. इन्हीं सब चीजों के कारण धरती के कुछ हिस्से ऐसे भी होते हैं, जहां छह महीने तक दिन ही रहता है और फिर अगले छह महीनों तक रात ही रहती है.

ये जगहें हैं धरती का उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव. अगर ऊन के गोले में एक सलाई आर-पार की जाए, तो जहां से सलाई अंदर जाती है और जहां से बाहर निकलती है, धरती के केस में वही ध्रुव होते हैं. ध्रुवों पर 6 महीने दिन और 6 महीने रात होती है और यहाँ सालभर बर्फ जमी होती है यहाँ लोगो के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी अत्यधिक अभाव है.

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सालों से जमी है कई फीट ऊंची बर्फ

यहां लोगों का जनजीवन बेहद कठिन है इसलिए यहाँ बहुत कम जनसँख्या का निवास है . अगर ध्रुवों के पिन पॉइंट की बात करें, तो वहां तो कोई नहीं ही रहता है. क्योंकि वहां स्थितियां बहुत खराब होती हैं. जो लोग रहते हैं, वे ध्रुवों के आसपास रहते हैं. उत्तरी ध्रुव के आसपास जो कुछ देश हैं- जैसे ग्रीनलैंड, नॉर्वे आदि. ये देश आर्कटिक सर्कल में आते हैं.

दक्षिणी ध्रुव में उत्तरी ध्रुव की अपेक्षा ठंड ज्यादा है क्योंकि उत्तरी ध्रुव महासागर के मध्य में समुद्र स्तर पर स्थित है . उत्तरी ध्रुव पर समुद्र पर जमी  बर्फ की 2-3 मीटर मोती परत है जबकि दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की परत की मोटाई  1-2 मीटर तक है . उत्तरी ध्रुव आर्कटिक महासागर में स्थित है जबकि दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिक महाद्वीप में स्थित है . अंटार्कटिक महाद्वीप में कई देशों ने अपने वैज्ञानिक अनुसन्धान केंद्र स्थापित किए हैं .

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दुनिया की सबसे ठंडी जगह हैं ध्रुव

अंटार्कटिका को दुनिया की सबसे ठंडी जगह के रूप में दर्ज किया गया है . इसे बर्फ का रेगिस्तान भी कहते है . अंटार्कटिक महाद्वीप में भारत ने भी अपने अनुसन्धान केंद्र स्थापित किए हैं. इनके नाम मैत्री (1989) , दक्षिण गंगोत्री (1983) और भारती (2012) हैं. ये केंद्र ध्रुव के पिन पॉइंट से काफी दूर हैं, फिर भी यहां रहना आसान नहीं है.

ध्रुवों पर जीवन ऐसा है कि इंसान वहां कभी नहीं रहना चाहेगा. ग्रीनलैंड और नॉर्वे जैसे देशों के जो लोग आर्कटिक सर्किल के आसपास रहते हैं, उन्हेें मौसम से जुड़ी तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. यही कारण है कि ठीक ध्रुव के पास न कोई रहता है और न ही वहां कोई स्थायी ढांचा है.

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