शाम ढलने के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी क्यों नहीं होती?

पुरानी फिल्मों में कई बार एक सीन आपने देखा होगा. किसी महिला से जुर्म हो जाता है और पुलिस को उस तक पहुंचने में शाम हो जाती है तो उसे रात की गिरफ्तारी से मोहलत मिल जाती है. महिला को सुबह गिरफ्तार किया जाता है. हकीकत में भी ऐसा ही होता है. अपवादों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी महिला की गिरफ्तारी किसी भी अपराध की दशा में शाम ढलने के बाद नहीं की जा सकती है. महिलाओं की गिरफ्तारी के कुछ नियम और शर्तें हैं, जिन्हें जानना जरूरी है.

दरअसल कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें गिरफ्तार महिला के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुई हैं. महिलाओं से जुड़े ऐसे अपराधों को रोकने के लिए एक नियम बनाया गया है कि किसी भी महिला को शाम छह बजे के बाद और सुबह छह बजे से पहले गिरफ्तारी नहीं की जा  सकती. 

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IPC में तय किए गए हैं गिरफ्तारी के नियम

दंड प्रक्रिया संहिता(CRPC), 1973 की धारा 46 महिलाओं की गिरफ्तारी पर स्पष्ट निर्देश देती है कि महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय के पहले किसी भी कीमत पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.  महिला को सिर्फ महिला अधिकारी को ही छूने का अधिकार है. किसी भी पुरुषकर्मी महिला की गिरफ्तारी नहीं कर सकता. 

अगर परिस्थितियां बेहद जटिल हैं और गिरफ्तारी बेहद जरूरी हो तब एक महिला पुलिस अधिकारी को पहले प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की पहले परमिशन लेनी होगा, जिसके ज्यूरिडिक्शन के भीतर महिला ने अपराध किया हो. ऐसी दशा में गिरफ्तारी महिला ही करेगी.  सीआरपीसी में गिरफ्तारी के संबंध में सभी धाराएं 41 से 60 के बीच में हैं. इनमें वारंट से जुड़ी हुई धाराओं का भी जिक्र है. 

स्त्री-पुरुष दोनों को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना जरूरी होता है. इसका जिक्र संविधान के मौलिक अधिकार में भी है. 

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गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी

संविधान का अनुच्छेद 22 यह कहता है कि किसी भी व्यक्ति को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे गिरफ्तारी का कारण न बताया जाए. उसे अपना वकील चुनने का भी अधिकार होगा. गिरफ्तार व्यक्ति का हक है कि उसे 24 घंटे के भीतर कोर्ट के सामने पेश किया जाए. अगर देरी हो तो उपयुक्त कारण भी मजिस्ट्रेट को बताना होगा. 

एक कानूनी कहावत है कि Where there is right there is remedy. अगर कहीं अधिकारों का हनन है, तो उसका इलाज भी है. ऐसा कोई अधिकार नहीं है, जिसका उपचार नहीं है.

अपने अधिकारों को जानना जरूरी होता है. अगर आप अपने अधिकारों को नहीं जानते हैं तो कानूनी प्रावधान आपके गले की फांस भी हो सकते हैं और कोई उनका दुरुपयोग भी कर सकता है.

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