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रागिनी को ससुराल वालों ने नहीं समाज ने मारा है
2 जून 2017 को रागिनी की शादी संतकबीर नगर के, बौरव्यास गांव में रहने वाले रामेश्वर पाठक के साथ होती…
प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है
प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।
मॉब लिंचिंग: साधु मरे या मजदूर, समाज बुरी तरह फेल हो रहा है
तीन दिन पहले की खबर है। महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ ने तीन लोगों को घेरा। बुरी तरह पीटा। सूचना…
