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नव वर्ष कुछ यूं क्यों ना मंगलमय हो?
नव वर्ष की अनन्त शुभकामनाएं एवं बधाई। सभी बड़ों को प्रणाम और छोटों को ढेर सारा प्यार। आप सभी को…
जातीय लड़ाई में उलझता जा रहा है भारत का युवा
पुणे के भीमा-कोरेगांव से शुरू हुई जातीय हिंसा का असर महाराष्ट्र सहित पूरे देश में दिखने लगा है। सोमवार को…
ख़ुदकुशी…भवेश दिलशाद (शाद) की नज़्म
इसी इक मोड़ पर अक्सर गिरा जाता है ऊंचाई से अपनी ज़ात और ख़ाका मिटाया जाता है सब कुछ हो जिसमें ये सिफ़अत, क़ूवत कि जो अपना सके, जो घोल पाये सब कुछ अपने में
ग़मे-दिल और ग़मे जानां कहे बिन सह सके जो सब किसी इतनी बड़ी हस्ती के पहलू में किया जाता है सब कुछ गुम.
